अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग पर अड़ा धनगर समाज

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मुंबई- आरक्षण की मांग को लेकर मराठा समुदाय का आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। मराठा समुदाय के लोग सड़क पर उतर कर गिरफ्तारियां दे रहे हैं। इसी बीच धनगर समाज, मुस्लिम और लिंगायत समाज का आंदोलन भी उग्र होने के आसार हैं। यैसे में राज्य सरकार की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। धनगर समाज आरक्षण कृति समिति ने धनगर समुदाय को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग की है, अन्यथा उग्र आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी गई है।

मराठा समुदाय का जेल भरो आंदोलन, राज्य सरकार की बढ़ी मुश्किलें 

धनगर समुदाय ने सरकार को एक अगस्त तक का अल्टीमेटम दिया था। कृति समिति के नेताओं ने पांच अगस्त को राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ने के संबंध में निर्णय लेने की घोषणा की है। बुधवार को मराठा समाज का जेल भरो आंदोलन है। दूसरी ओर पुणे के दुधाने लॉन में प्रदेशभर के धनगर समाज के लोग इकठ्ठा होंगे और आदिवासी समुदाय में शामिल करने की मांग करेंगे। कृति समिति के नेताओं के अनुसार धनगर समाज के आरक्षण का पेंच धनगर और धनगड में अटका हुआ है। बांबे रजिस्ट्रेशन एक्ट में धनगर की बजाए धनगड का उल्लेख है। धनगरों का भेंड पालन परंपरागत व्यवसाय है। इसके अलावा नृत्य, गायन, देवी-देवताओं के संदर्भ में उनकी खास संस्कृति रही है। मानववंश शास्त्र में धनगरों का बंजारा समुदाय का होने का उल्लेख है। बिहार और झारखंड में धनगरों का आदिवासी समुदाय में समावेश है। इधर राज्य सरकार का मानना है धनगर और धनगड अलग-अलग जातियां हैं। आदिवासी कल्याण मंत्री विष्णु सावरा ने इस आशय़ का हलफनामा हाईकोर्ट को दिया है। समाज का कहना है धनगर और धनगड प्रशासकीय गलती है। राज्य में धनगड समाज अस्तित्व में नहीं है। धनगर कृति समिति ने चेतावनी दी थी कि एक अगस्त तक यह गलती नहीं सुधारी गई तो प्रदेश के पांच लाख धनगर समाज के लोग औरंगाबाद में सड़क पर उतरेंगे।
कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन सरकार में धनगर समाज का आंदोलन हुआ था। उन दिनों मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वादा किया था कि भाजपा सरकार आने के बाद मंत्रिमंडल की बैठक में धनगर समाज के मसले का हल निकाला जाएगा। परंतु चार वर्ष बीत गया है, मसला जस के तस बना हुआ है। धनगर समाज ने आरटीआई के तहत राज्य के सभी जिलों और तहसीलों से धनगड समाज की जनसंख्या का आंकड़ा मांगा था। आरटीआई के तहत मिले जवाब में कहा गया था कि राज्य में एक भी धनगड जाति के लोग नहीं है। इसीतरह आदिवासी मंत्रालय से आरटीआई के तहत 9 आवेदन भेजकर जानकारी मांगी गई थी। राज्य में वर्ष 1981 में 72 हजार, वर्ष 1991 में 97 हजार, वर्ष 2001 में 28 हजार और वर्ष 2011 में 48 हजार धनगड होने की जानकारी दी गई थी। धनगर समाज ने मुख्यमंत्री से धनगड समाज के लोगों के नाम पते और गांव की जानकारी मांगी है। समाज ने सवाल पूछा है आखिर तहसीलदार, समाज कल्याण अधिकारी और जिलाधिकारी के पास धनगड लोगों की जानकारी क्यों नहीं उपलब्ध है। धनगर समाज का आरोप है कि पिछले 70 वर्ष से हमारे कोटे के आरक्षण का फायदा दिवासी समाज उठा रहा है।
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