जाति सत्यापन प्रमाणपत्र के लिए 6 महीने की मोहलत 

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मुंबई- आरक्षित सीट पर चुनाव जीतनेवाले जनप्रतिनिधियों के लिए राज्य सरकार ने राहतभरा फैसला लिया है। अब विजयी उम्मीदवारों को जाति सत्यापन प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने के लिए 6 महीने की और मोहलत दे दी गई है। अब विजयी प्रत्याशियों को जाति सत्यापन प्रमाणपत्र देने के लिए एक साल का समय मिल गया है। इस आशय के प्रस्ताव को मंगलवार को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दी गई। 

सत्यापन प्रमाणपत्र न देनेवाले जनप्रतिनिधियों की सदस्यता रद्द करने का आदेश 

चुनाव आयोग को जाति सत्यापन प्रमाणपत्र न देनेवाले जनप्रतिनिधियों की सदस्यता रद्द करने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया है। इससे प्रदेश की निकाय संस्थाओं के करीब 9 हजार जनप्रतिनिधियों की सदस्यता रद्द होने की तलवार लटक रही है। इतने बड़े पैमाने पर सदस्यता रद्द हुई तो प्रदेश में उपचुनाव कराने पड़ेगें। आरक्षित सीटों से चुने गए जनप्रतिनिधियों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने जाति सत्यापन प्रमाणपत्र देने की समय सीमा छह महीने और बढ़ा दी है। अब जनप्रतिनिधियों को 12 महीने का समय मिल गया है। महानगरपालिका, नगरपालिका, जिला परिषद,  ग्राम पंचायत, पंचायत समिति जैसे निकाय संस्थाओं में आरक्षित सीट पर चुनाव जीतनेवालों को 6 महीने की मोहलत देने का निर्णय मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया।

इसके अलावा मंत्रिमंडल की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। इनमें शहरी महानेट और राज्य मेें ई-शासन सेवा वितरण के प्रस्ताव को मंजूरी। वैट में जमानत राशि का प्रावधान रद्द करने, अकोला जिले में कारंजा रमजानपुर में बांध के लिए 211.15 करोड़ रुपए की मंजूरी, अकोला के तेल्हारा तहसील के पूर्णा बैरेज-2 (नेर धामणा) मध्यम परियोजना के लिए 888.81 करोड़ रुपए की संशोधित मंजूरी,  पुणे जिले के कुकडी बांध परियोजना के लिए 3948.17 करोड़ रुपए की तृतीय संशोधित मंजूरी और केंद्र सरकार पुरस्कृत योजना के तहत महानिर्मिति के कोराडी तालाबों का संवर्धन करने का निर्णय लिया गया है।

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