सातबारा उतारा पर अब डीजिटल हस्ताक्षर

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फडणवीस सरकार की नई पहल – जमीन धांधली रोकने की कवायद 
मुंबई- राज्य की फडणवीस सरकार ने किसानों के खेत के सातबारा उतारे को लेकर होनेवाले विवाद पर अंकुश लगाने के लिए नई पहल की है। अब किसानों को कंप्युटरकृत डीजिटल सहीवाला सातबारा उतारा मिलेगा। यह सुविधा करनेवाला महाराष्ट्र देश का पहला राज्य बन गया है। राज्य सरकार ने अभीतक डीजिटल हस्ताक्षरवाले आठ लाख सातबारा उतारा तैयार करने का काम पूरा कर लिया गै। शेष बचे उतारों का काम एक अगस्त तक पूरा कर लिया जाएगा।
सातबारा डीजिटाइजेशन के तहत जमीन के पंजीकरण की संपूर्ण प्रक्रिया पारदर्शी होगी। आपली चावडी’ इस वेबसाइट और सार्वजनिक निर्माण विभाग की ओर से तैयार किए गए प्रदेश के पुलों के प्लान की पुस्तिका का प्रकाशन किया गया। https://mahabhulekh.maharashtra.gov.in/ वेबसाइट पर डीजिटल हस्ताक्षरयुक्त सातबारा उतारा प्राप्त करने के लिए पर जाना होगा। वहां जिला तहसील, गांव, सर्वे क्रमांक/गट क्रमांक आदि की जानकारी भरने के बाद पीडीएफ स्वरुप का डीजिटल हस्ताक्षरवाला सातबारा दिखेगा।
किसानों की जमीनों को लेकर होनेवाली धांधली पर अंकुश लगाने की दिशा में यह राज्य सरकार का अहम कदम माना जा रहा है। मंगलवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटिल की उपस्थिती में डीजिटल हस्ताक्षर युक्त सातबारा डीजिचल सुविधा का लोकार्पण किया गया। मुख्यमंत्री के मुताबिक आगामी एक अगस्त तक सभी ढाई लाख उतारे डीजिटल हस्ताक्षरयुक्त कर दिए जाएंगे। सातबारा डीजिटाइजेशन के तहत जमीन के पंजीकरण की संपूर्ण प्रक्रिया पारदर्शी होगी। आपली चावडी’ इस वेबसाइट और सार्वजनिक निर्माण विभाग की ओर से तैयार किए गए प्रदेश के पुलों के प्लान की पुस्तिका का प्रकाशन किया गया। डीजिटल हस्ताक्षरयुक्त सातबारा उतारा प्राप्त करने के लिए https://mahabhulekh.maharashtra.gov.in/ वेबसाइट पर पर जाना होगा। वहां जिला तहसील, गांव, सर्वे क्रमांक/गट क्रमांक आदि की जानकारी भरने के बाद पीडीएफ स्वरुप का डीजिटल हस्ताक्षरवाला सातबारा दिखेगा। किसान उसका प्रींट निकालकर उपयोग में ला सकेंगे। यह सभी सरकारी कामों के लिए मान्य होगा और उस पर किसी हस्ताक्षर की जरूरत नहीं होगी। आपली चावडी (http://mahabhumi.gov.in/aaplichawdi) वेबसाइट डीजिटल नोटिस बोर्ड है, इस पर अपने गांव की जनीन के पंजीकरण के फेरबदल, फेरफार की स्थिति आदि की जानकारी उपलब्ध रहेगी। इसीतरह ग्रामसभा,चुनाव की नोटिस, के कारण जमीन के होनेवाले व्यवहार की पारदर्शिकता रहेगी।
मुख्यमंत्री के अनुसार ग्रामीण इलाकों में सातबारा किसानों के जीवन का अविभाज्य हिस्सा होता है। गांव में सातबारा प्राप्त करना और वह भी फेरफार करके प्राप्त करना कठिन काम होता है। परंतु अब आनलाइन डीजिटल हस्ताक्षरवाला सातबारा नागरिकों के लिए बेहद सुविधाजनक होगा। मौजूदा समय में प्रदेश के 40 हजार गांवों का सातबारा उतारा आनलाइन हो गया है और उसमें से 8 लाख सातबारा उतारा डीजिटल हस्ताक्षरयुक्त हो गया है। सातबारा प्राप्त करने के लिए किसानों को कूई समस्याओं का सामना करना पड़ता था। अब आनलाइन हस्ताक्षरयुक्त सातबारा प्राप्त करने के बाद, फिर से उसे निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी। बैंक अथवा संबंधित विभाग आनलाइन पद्धति से सातबारा की पुष्टि कर लेंगे। फडणवीस ने बताया कि जमीनों के मुकदमों का प्रमाण बढ़ गया है।
तकनीक के कारण अब जमीन का माप करना सरल हो गया है। ड्रोन के माध्यम से जमीनें नापी जाएंगी, जिससे डीजिटाईजेशन के माध्यम से राजस्व मुकदमे कम करने का राज्य सरकार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व विभाग के पास 150 वर्षों से ज्यादा का पंजीकरण है। इन सभी पंजीकरणों का डीजिटाइजेशन कर दिया गया है।
 राजस्व मंत्री पाटिल के अनुसार प्रदेश की जमीनों का नक्शा डीजिटाइजेशन किए जाने का काम गति से शुरू है। प्रत्येक जिलों के राजस्व विभाग के तकरीबन ढाई करोड़ कागजातों को भी डीजिटाइजेशन के रूप में एकत्रित करने का काम शुरू है। श्रीवास्तव ने कहा कि आनलाइन सातबारा के फेरबदल में लोगों को अपना पंजीकरण कराने की सुविधा भविष्य में उपलब्ध कराई जाएगी। ई चावडी के माध्यम से लेखपालों के सभी दफ्तर आनलाइन किए जाएंगे। छह जिलों में शुरू जमीनों के नक्शे का डीजिटाइजेशन करने के साथ ही शीघ्र शेष बचे डीजिटाइजेशन का काम 28 जिलों में शुरू किया जाएगा। इस दरम्यान शुरू की गई अत्याधुनिक सुविधा का इस्तेमाल करते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस और राजस्व मंत्री पाटिल ने अपना सातबारा उतारा निकाला।
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