अजिंक्य योद्धा : उत्तरभारतीय निर्माता का मराठी नाटक

Download PDF
हिंदी और मराठी भाषियों की एकता की मिसाल अजिंक्य योद्धा
मुंबई- हिंदी और मराठी भाषियों मे द्वेष निर्माण करने की कई सियासी कोशिशें होती रही हैं, लेकिन एक हिंदीभाषी निर्माता ने बाजीराव पेशवा के महानाट्य का मंचन करके हिंदी और मराठी भाषियों के सामाजिक भाईचारे की मिशाल कायम की है।
सांस्कृतिक मंत्री तावड़े के अनुसार आज की पीढ़ी छत्रपति शिवाजी महाराज के केवल उस इतिहास को जानती है, जिसमें उन्होंने अफजल खान की अंतड़ी निकाल ली थी या फिर मुगलों के कड़े पहरे बीच सकुशल बाहर निकल गए थे। कम ही लोग जानते हैं कि शिवाजी महाराज वीर योद्धा होने के साथ-साथ कुशल प्रशासक भी थे। उन्होंने महानाट्य के निर्माण के लिए टीम को सफलता की बधाई दी।
 यूपी से ताल्लुक रखनेवाले संजय पांडे ने बाजीराव पेशवा की जीवनी पर आधारित अजिंक्य योद्धा नाटक का निर्माण किया है। नाटक का म्युजिक लांच होने के साथ ही सुखिर्यों में है। प्रदेश के सांस्कृतिक मंत्री विनोद तावड़े ने म्युजिक लांच किया। इस अवसर पर नाटक के सभी किरदार मौजूद थे। नाटक की विशेषता यह है कि 112 फुट लंबे, 92 फुट चौड़े और 29 फुट उंचे मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। मंच पर असली घोड़े दौड़ेगें। इस नाटक को 2 वर्ष की कड़ी मेहनत के बाद तैयार किया गया है। इसमें कुल 130 कलाकर अपना अभिनय प्रस्तुत करेंगे। संगीत को प्रशिद्ध गायक आदर्श शिंदे, अवधूत गुप्ते और उनकी टीम ने स्वर दिया है। निर्देशन वरूणा मदनलाल राणा और नाटक के लेखक प्रताप गंगावणे हैं।
सांस्कृतिक मंत्री तावड़े के अनुसार आज की पीढ़ी छत्रपति शिवाजी महाराज के केवल उस इतिहास को जानती है, जिसमें उन्होंने अफजल खान की अंतड़ी निकाल ली थी या फिर मुगलों के कड़े पहरे बीच सकुशल बाहर निकल गए थे। कम ही लोग जानते हैं कि शिवाजी महाराज वीर योद्धा होने के साथ-साथ कुशल प्रशासक भी थे। उन्होंने महानाट्य के निर्माण के लिए टीम को सफलता की बधाई दी।
निर्माता पांडे के मुताबिक कॉलेज छात्र जीवन में सहपाठियों के साथ उनका इतिहास को लेकर चर्चा और वाद-विवाद होता था। अभिभावकों द्वारा बताई गई बातें, राजनीतिक बयान और टीवी-फिल्म में दिखाए जानेवाले दृश्यों को आधार बनाकर हम तर्क-कुतर्क किया करते थे। अचंभा होता था कि एक ही इतिहास के अलग-अलग पहलू कैसे हो सकते हैं। पांडे के मुताबिक युवा पीढ़ी इतिहास को लेकर केवल तर्क-वितर्क में अपना अमूल्य समय बर्बाद कर देती है। दरअसल असली इतिहास तो उन तक पहुंचा ही नहीं है। संभ्रम का दूरगामी परिणाम भविष्य पर होता है। असली इतिहास युवा तक पहुंचाने का नाटक सशक्त माध्यम हो सकता है, इसीलिए उन्होंने अजिंक्य योद्धा का निर्माण किया है।
पांडे के अनुसार बाजीराव पेशवा का इतिहास उनके सिर्फ व्यक्तिगत जीवन पर लिखा गया है। उनके पराक्रम और शौर्य को नजरअंदाज किया गया है। उन्हें केवल प्रेम नायक तक सीमित रखा गया। बतौर सेनापति रहते हुए बाजीराव अपने बीस वर्ष के कार्यकाल में एक भी लड़ाई में पराजित नहीं हुए। इसीलिए बाजीराव का इतिहास लोगों तक पहुंचाने के लिए उन्होंने अजिंक्य योद्धा का निर्माण किया है।
Download PDF

Related Post