सनातन संस्था पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव विचाराधीन

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मुंबई-  सनातन संस्था पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को महायुति सरकार भी भेज चुकी है। इसका खुलासा खुद प्रदेश के गृह राज्यमंत्री दीपक केसरकर ने किया है। केसरकार ने कहा है कि सनातन संस्था पर पाबंदी लगाए जाने के लिए प्रस्ताव राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के पास भेजा गया है, लेकिन यह प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास विचाराधीन है।

राज्य सरकार ने 2 साल पहले केंद्र को प्रस्ताव भेजा था

केसरकर ने बताया कि सनातन संस्था पर पाबंदी लगाने के लिए राज्य सरकार ने 2 साल पहले केंद्र को प्रस्ताव भेजा था। उस समय केंद्र सरकार ने उस प्रस्ताव में त्रुटि निकालकर राज्य सरकार को वापस भेज दिया था। इसके बाद संशोधन करके फिर से प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेजा गया है।  दीपक केसकरकर ने एटीएस के कामकाज पर संतोष व्यक्त किया और कहा कि एटीएस बहुत ही अच्छा काम कर रहा है। 

 

 याद दिला दें कि सनातन संस्था पर पाबंदी की मांग 2015 में की गई थी। उस समय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि सनातन संस्था पर पाबंदी की मांग राजनीतिक कारणों की वजह से की जा रही है। राज्य सरकार किसी के दबाव में आकर किसी भी संस्था पर पाबंदी लगाने का निर्णय नहीं लेने वाली है। हालांकि सनातन संस्था की आपराधिक गतिविधियों को देखते हुए राज्य सरकार ने  पाबंदी लगाने का प्रस्ताव केंद्र के पास भेजा था। इधर कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण का दावा है कि सनातन संस्था पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव उन्होंने केंदर सरकार को पांच साल पहले भेजा था। लेकिन अभी तक इस पर फैसला नहीं हो सका है।


नालासोपारा में गिरफ्तार वैभव राऊत, शरद केलस्कर व सचिन अंडुरे का संबंध सनातन संस्था से रहा है। इसी तरह इस मामले में गिरफ्तार सुधन्वा गोंधलेकर व श्रीकांत पांगारकर का संबंध भी हिंदू जन जागृति समिति से रहने की जानकारी सामने आई है। इतना ही नहीं शरद केलस्कर की संलिप्तता दाभोलकर हत्या मामले में होने की जानकारी सीबीआई को मिली है। इसलिए एटीएस की कस्टडी समाप्त होने के बाद सीबीआई केलस्कर का रिमांड कोर्ट से मागने वाली है। इन सभी मामलों की गहन जांच जारी है और हर दिन नए तथ्य सामने आ रहे हैं।
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