दिवालिया हुई कांग्रेस, मांग रहे घर-घर जाकर चंदा !

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मुंबई। देश की बड़ी राजनीतिक पार्टियों में शुमार कांग्रेस की तिजोरी कंगाल हो गई है। आर्थिक संकट से उबरने के लिए कांग्रेस ने जनसंपर्क अभियान की शुरुआत की है। इसके तहत लोगों से दान देने की अपील की जा रही है। पार्टी के प्रत्येक बूथों पर 22,000 कूपन दिए गए हैं, जिसके माध्यम से 100, 500 व 1000 रूपए के चंदे जुटाए जा रहे हैं। 

लोगों से दान देने की अपील

मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम ने अपने क्षेत्र अंधेरी पश्चिम से इस अभियान की शुरुआत की। निरूपम ने कई घरों व दुकानों में जाकर लोगों से मदद मांगी। इसीतरह कांग्रेस कार्यकर्ता खुद अपनी क्षमता के अनुसार कूपन खरीदेंगे और घर-घर जाकर लोगों को कूपन बेचकर संगठन के लिए आर्थिक मदद जुटाएंगे। निरुपम के मुताबिक पार्टी कार्यकर्ता प्रत्येक विभाग के घरों में जाकर लोगों से मदद की अपील करेंगे।
पिछले कुछ सालों में कांग्रेस की आर्थिक हालत काफी ख़राब हुई है। राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव आयोग को दी गई रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा की कमाई में बीते एक वर्ष में 81 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। जबकि कांग्रेस की कमाई में 14 प्रतिशत की कमी आई है। जानकारों का कहना है कि भाजपा शासित राज्यों की संख्या में लगातार इजाफा होने से पार्टी की कमाई पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुनी हो चुकी है। 
 
कांग्रेस की खराब आर्थिक स्थिति की वजह से राज्य इकाइयों को ऑफिस खर्च के नाम पर दिए जाने वाले फंड को बंद कर दिया गया है। पार्टी हाईकमान ने पार्टी सदस्यों से अपना योगदान बढ़ाने व पार्टी इकाइयों से अपना खर्च कम करने के निर्देश दिए हैं। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में हार का सामना करने के बाद से कांग्रेस को औद्योगिक घरानों से मिलने वाले चंदे में बड़ी गिरावट दर्ज हुई है।
नोटबंदी की वजह से भी पार्टी की मुश्किलें बढ़ी हैं। कांग्रेस के कई उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने के लिए लोगों से मदद लेनी पड़ी है। हालात यह हैं कि कार्यालय खर्च उठाने में दिक्कतें आ रही हैं। संगठन के काम के लिए खरीदी गई गाडि़यां दफ्तर में खड़ी-खड़ी धूल फांक रही हैं। पेट्रोल-डीजल भराने के लिए आर्थिक स्थिती साथ नहीं दे रही है। 
 
एसोसिएशन ऑफ़ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के आंकड़ो पर गौर करें तो भाजपा के बैंक बैलेंस में 463.41 करोड़ रुपए का इजाफा हुआ है। वित्तीय पर्ष 2015 में पार्टी का फंड 570.86 करोड़ रुपए से बढ़कर 2016-17 में 1,034.27 करोड़ रुपए हो गया है।  इस दौरान कांग्रेस के फंड में पिछले साल के मुकाबले 36.20 करोड़ रुपए की कमी आई है। वित्तीय वर्ष 2015-16 के दौरान कांग्रेस को 261.56 करोड़ रुपए के चंदे मिले, जबकि 2016-17 के दौरान पार्टी को महज 225.36 करोड़ रुपए के दान मिलें हैं। इसीतरह विपक्षी दलों की आर्थिक स्थिती बेहद खराब है। 
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