बढ़ते वैश्विकरण में बहुभाषी होना जरूरी – देवेंद्र भुजबल

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मुंबई। महाराष्ट्र के पूर्व सूचना निदेशक व लेखक देवेंद्र भुजबल का मानना है कि वर्तमान में तेजी से बढ़ते वैश्विकरण में बहुभाषिक होना जरूरी है।  उनका कहना है कि भाषा से संवाद होता है और संवाद से भावनाएं समझ में आती हैं। आदमी भावनाओं से एक दूसरे से जुड़ता है, उसका साधन केवल भाषा है। लिहाजा तेजी से बढ़ रहे वैश्वीकरण में मराठी भाषा के गौरव के साथ ही सभी को बहुभाषी होना भी आवश्यक है। 

कुआलालंपुर में शब्द परिवार की ओर से आयोजित पांच दिवसीय विश्व मराठी साहित्य सम्मेलन

मलेशिया के कुआलालंपुर में शब्द परिवार की ओर से आयोजित पांच दिवसीय विश्व मराठी साहित्य सम्मेलन का उद्घाटन भुजबल के हाथों हुआ। इस अवसर पर महाराष्ट्र के सौ से अधिक साहित्कार, लेखक, पत्रकार और कवि मौजूद थे। भुजबल ने कहा कि भाषा से इतिहास, लोक परंपरा, लोकजीवन, संस्कृति का प्रचार-प्रसार होता है और उसका जतन व संरक्षण करने में मदद मिलती है। इसलिए मातृभाषा को नहीं भुलाया जा सकता। बहुभाषिक होने से भाषा के माध्यम से लोगों को जोड़ने में आसानी होती है। 

भुजबल ने कहा कि मौजूदा समय में अखिल भारतीय मराठी महामंडल का 92 वां साहित्य सम्मेलन महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में शुरू है। अन्य राज्यों में इसतरह के सम्मेलन नहीं होते। यह केवल महाराष्ट्र में होते हैं। महाराष्ट्र राज्य की गौरवशाली परंपरा है।  विदर्भ, विद्रोही, आदिवासी, दलित, कोकण और मराठवाडा आदि चालीस से अधिक प्रकार के साहित्य सम्मेलनों का आयोजन किया जाता है। एसे सम्मेलनों से परस्पर संवाद बढ़ने के साथ ही साहित्य विचारों का आदान प्रदान भी होता है। यह हमारे लिए गर्व की बात है। अखिल भारतीय मराठी साहित्य महामंडल समेत सरकार को भी इस तरह के सम्मेलनों को सशक्त बनाने की दिशा में प्रयास करना चाहिए।  

 भुजबल ने कहा कि शब्द परिवार ने बिना किसी सरकारी अनुदान अथवा प्रायोजक की मदद लिए विश्व मराठी साहित्य सम्मेलन का आयोजन किया है। जो हमारे लिए अभिमान की बात है। इस सम्मेलन में महाराष्ट्र सहित दुनिया भर से कवि, लेखक और साहित्यकार शामिल हुए हैं। नई पीढ़ी का भाषा पर संवाद, कविता, गजल मुशायरा और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। शब्द परिवार इससे पहले थाईलैंड, दुबई और इंडोनेशिया में सम्मेलन का आयोजन कर चुका है।


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