भारत बंद : महाराष्ट्र के कुछ जिलों में पथराव और आगजनी.

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– महाराष्ट्र में  भी दिखा भारत बंद का असर –
मुंबई- अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (एसएसी/एसटी एक्ट) को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के विरोध में दलित और आदिवासी संगठनों ने देशभर में आज भारत बंद आंदोलन किया। इसका असर पूरे देश में देखाई दिया,  साथ ही महाराष्ट्र के कुछ जिलों में पथराव और आगजनी की घटनाएं घटी। राजधानी मुंबई में हालात शांतिपुर्ण रहे लेकिन उपराजधानी नागपुर, नंदुरबार, नांदेड़ और पालघर में हिंसक घटनाओं की जानकारी मिली है।
मध्य-प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में हालात काबू से बाहर हो गए। मध्यप्रदेश में पांच, राजस्थान और उत्तरप्रदेश में एक-एक के मौत की खबर है। महाराष्ट्र में भी कुछ जिलों में उपद्रव की जानकारी मिली है। कहीं रेल रोकी गई तो कहीं पथराव और आगजनी की घटनाएं हुईं।
मध्य-प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में हालात काबू से बाहर हो गए। मध्यप्रदेश में पांच, राजस्थान और उत्तरप्रदेश में एक-एक के मौत की खबर है। महाराष्ट्र में भी कुछ जिलों में उपद्रव की जानकारी मिली है। कहीं रेल रोकी गई तो कहीं पथराव और आगजनी की घटनाएं हुईं। नांदेड़ में आंदोलनकारियों ने रेल रोको आंदोलन किया। आंदोलनकारियों ने तपोवन एक्सप्रेस को रोकने का प्रयाश किया और दलित उत्पीड़न एक्ट के समर्थन में जमकर नारेबाजी की।  मुंबई में महौल शांतिपुर्ण रहा। दुकानें खुली रही और कारोबार पर असर नहीं पड़ा। पब्लिक ट्रांसपोर्ट में कोई व्यवधान नहीं पड़ा। भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने बांद्रा स्थित मुंबई उपनगर जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर उग्र प्रदर्शन किया। एट्रोसिटी कानून को अधिक कठोर बनाने के लिए सरकार कारगर कदम उठाए, इसकी मांग इस अवसर पर की गई। पालघर में भारत बंद का मिलाजुला असर दिखाई दिया।  बोइसर-चिल्हार हाइवे पर आंदोलनकारियों ने रास्ता रोको किया।   पालघर- बोइसर में बाजार बंद रहे।
नंदुरबार में राज्य परिवहन मंडल की बसों पर पथराव किया गया। आंदोलनकारियों ने केंद्र सरकार के विरोध में जमकर नारे लगाए।  नागपुर के इंदोरा मैदान के पास आंदोलनकारियों ने एक बस पर पथराव किया और उसे जलाने की कोशिश की। परंतु मौके पर मौजूद पुलिस और फायर ब्रिगेड के जवानों ने समय रहते आग बुझा दी। बस को यात्रियों से खाली करा लिया गया था। आंदोलनकारियों की मांग है कि कानून मजबूत बनाया जाना चाहिए, जबकि मोदी सरकार ने कोर्ट में कमजोर पक्ष रखा।  इधर केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के  निर्णय से केंद्र सरकार भी सहमत नहीं है। कानून में बदलाव के लिए सरकार फिर से पुनर्विचार याचिका दायर करेगी।
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