भीमा कोरेगांव के आरोपियों को बचाने का आऱोप

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 मुंबई- भीमा कोरेगांव प्रकरण के दोषियों को बचाने में राज्य सरकार निष्क्रियता दिखा रही है। सरकार नहीं चाहती कि भीमा कोरेगांव के आरोपी पकड़े जाएं औऱ मामले की तहकीकात हो। राज्य सरकार सामाजिक विद्वेष फैलाकर अपनी राजनीतिक रोटी सेंकना चाह रही है। विपक्ष ने सोमवार को इस मामले की जांच कराने की मांग करते हुए हंगामा शुरू किया, लेकिन सरकार ने चर्चा कराने से ही मना कर दिया।
विपक्ष का आरोप है कि राजनैतिक व सामाजिक दबाव के बाद मिलिंद एकबोटे को गिरफ्तार करने में सरकार को ढाई महीने लगे, जबकि संभाजी भिडे को आज तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है।
सोमवार को जैसे ही विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुईष विपक्ष ने आक्रामक भूमिका अपनाई। भीमा कोरेगांव प्रकरण में मिलिंद एकबोटे और संभाजी भिडे के नाम पर एफआईआर दर्ज होने के बाद दोनों की गिरफ्तारी को लेकर सरकार ने निष्क्रियता दिखाई। राजनैतिक व सामाजिक दबाव के बाद मिलिंद एकबोटे को गिरफ्तार करने में सरकार को ढाई महीने लगते हैं, जबकि संभाजी भिडे को आज तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। यह राज्य सरकार और गृह मंत्रालय की सबसे बड़ी नाकामी है। राज्य सरकार जानबूझकर भीमा कोरेगांव मामले के आऱोपियों को बचा रही है। ऐसा तीखा आऱोप विरोधी पक्षनेता राधाकृष्ण विखे-पाटील ने सोमवार को विधानसभा में लगाया। पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने भी मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य की कानून व्यवस्था लचर होती जा रही है। अपराधियों पर सरकार का कोई अंकुश नहीं रहा। जस्टिस लोया मामले में भी सरकार की चुप्पी संदेह पैदा कर रही है।
भीमा कोरेगांव प्रकरण की जांच की मांग करते हुए विरोधी पक्षनेता राधाकृष्ण विखे-पाटील और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के जितेंद्र आव्हाड ने स्थगन प्रस्ताव के तहत सरकार की नाकामी पर मुख्यमंत्री की आलोचना की। विपक्ष ने इस मामले में चर्चा कराने की मांग की, लेकिन विपक्ष के इस प्रस्ताव को राज्य सरकार ने खारिज कर दिया। कई बार सदन की कार्यवाही बाधित हुई। सदन का कामकाज शुरू होने के बाद विरोधी पक्ष नेता  विखे पाटील ने कहा कि संभाजी भिडे के कार्यक्रमों को राज्य सरकार की मंजूरी मिल जाती है, लेकिन इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद आऱोपी भिडे को गिरफ्तार करने में पुलिस प्रशासन नाकाम हो गया है। विपक्ष ने कहा कि भिडे की गिरफ्तारी की मांग को लेकर एड. प्रकाश आंबेडकर की ओर से यलगार मोर्चा निकाला जा रहा है। लेकिन उनके मोर्चे पर राज्य सरकार ने रोक लगाने का प्रयास किया।
राकांपा के जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि एक तरफ राज्य सरकार के खुफिया तंत्र और पुलिस प्रशासन को दोनों आऱोपियों के बारे में कोई सुराग नहीं मिलता, लेकिन मिलिंद एकबोटे खुलेआम पत्रकार परिषद आयोजित करता है। उसमें वह सरकार को धमकी भी देता है। उससे मिलने खुद जिलाधिकारी, पुलिस अधिकारी और अन्य लोग जाते हैं। इससे स्पष्ट हो रहा है कि सरकार जानबूझकर उसे गिरफअतार नहीं करना चाह रही थी। भिडे को भी बचाया जा रहा है। रत्नागिरी के खेड तालुका में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा को तोड़ने का मुद्दा उपस्थित करते हुए राकांपा के बालसाहब कदम ने कहा कि दोषियों को गिरफ्तार कर कड़ी कार्रवाई करना चाहिए।
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