सलामत रहेगा भाजपा-शिवसेना का दोस्ताना- चंद्रकांत पाटिल  

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मुंबई- भाजपा-शिवसेना के बीच बढ़ रही सियासी दुश्मनी को खाऱिज करते हुए राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने दावा किया है दोनों दलों का गठबंधन वर्ष 2090 तक महफूज रहेगा। उन्होंने दोनों दलों में होनेवाले मनमुटाव की तुलना घर के दो भाईयों से की है। उन्होंने कहा कि हम आपस में जरूर लड़ते हैं लेकिन दोनों की विचारधारा एक है, हम एक-दूसरे से अलग नहीं हो सकते।
दोनों दलों में मतभेद को दूर करने के लिए दोनों पक्षों के आला नेता प्रयास करते हैं। छोटे-मोटे मुद्दों को लेकर दोनों ओर से बयानबाजियां हो जाती हैं। परंतु जरूरत पड़ने पर दोनों पार्टियां साथ हो जाती हैं। विधान परिषद चुनाव में जिस तरह गठबंधन हुआ है, उसीतरह आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भी दोनों पार्टियों का गठंबधन होगा – पाटिल 
पाटिल ने कहा कि भाजपा और शिवसेना के बीच कोई मतभेद नहीं है। दोनों पार्टियां एक साथ हैं। दोनों दलों में होनेवाला टकराव दो सगे भाईयों जैसा है। जैसे एक घर के दो भाई आपस में लड़ते हैं, फिर एक हो जाते हैं। वैसे ही भाजपा-शिवसेना में भी टकराव होता रहता है। दोनों पार्टियों का गठबंधन अगले चुनाव तक ही नहीं बल्कि वर्ष 2090 तक अटूट रहेगा। उन्होंने कहा कि दोनों दलों में मतभेद को दूर करने के लिए दोनों पक्षों के आला नेता प्रयास करते हैं। छोटे-मोटे मुद्दों को लेकर दोनों ओर से बयानबाजियां हो जाती हैं। परंतु जरूरत पड़ने पर दोनों पार्टियां साथ हो जाती हैं। विधान परिषद चुनाव में जिस तरह गठबंधन हुआ है, उसीतरह आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भी दोनों पार्टियों का गठंबधन होगा। हमारी युति भविष्य में भी बरकरार रहेगी।
याद दिला दें कि कोकण में प्रस्तावित नाणार रिफाइनरी परियोजानों को लेकर भाजपा और शिवसेना में ठनी हुई है। उद्योग मंत्री सुभाष देसाई परियोजना के विरोध में अपने फैसले पर अडिग हैं। उन्होंने परियोजना की भूमि अधिग्रहण की फाइल विभाग के मुख्य सचिव से मंगाई है। देसाई के मुताबिक जब तक 80 फीसदी लोग जमीन देने पर सहमति नहीं दर्शाते तब तक जमीन अधिग्रहित नहीं की जा सकती। उधर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस कह चुके हैं कि उद्योग मंत्री को परियोजना के लिए जारी की गई भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना को रद्ध करने का अधिकार ही नहीं है। नाणार परियोजना को लेकर मंत्रिमंडल की बैठक में दोनों दलों के मंत्रियों में जुबानी जंग हो चुकी है।
शिवसेना पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे एेलान कर चुके हैं कि आगामी चुनाव शिवसेना अकेली लड़ेगी। उन्होंने भाजपा को कपटी दोस्त बताते हुए एनडीए गठबंधन से नाता तोड़ने की घोषणा दशहरा रैली में की थी। शिवसेना में सुगबुगाहट है कि जल्द पार्टी सत्ता से भी बाहर हो जाएगी। हालांकि विधान परिषद की स्थानीय निकाय की 6 सीटों के चुनाव में भाजपा-शिवसेना ने हाथ मिलाया है।
बागी वनगा परिवार ने की जल्दबाजी- भाजपा 
इसबीच,  शिवसेना में शामिल होनेवाले पालघर के पूर्व भाजपा सांसद चिंतामण वनगा के परिवार के संबंध में राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटिल कोई टिप्पणी करने से कतराते नजर आए। हालांकि उन्होंने कहा कि वनगा परिवार ने भाजपा छोडऩे की जल्दबाजी कर दी । पालघर संसदीय चुनाव क्षेत्र से उनके परिवार वालों को ही भाजपा उम्मीदवारी देने का विचार कर रही थी।
पाटिल के अनुसार चिंतामण वनगा पिछले 37 वर्षों से भाजपा में थे। पार्टी ने वनगा को पद, प्रतिष्ठा और सम्मान दिया। चिंतामण वनगा के निधन के बाद भी भाजपा उनके परिवार को राजनीतिक आश्रय देने का विचार कर रही थी। लेकिन वनगा की पत्नी व बेटे ने अप्रत्याशित तरीके से भाजपा छोडऩे का निर्णय लिया और शिवसेना में शामिल हो गए हैं। वनगा की पत्नी व बेटे के बारे में खुद पार्टी प्रदेश अध्यक्ष रावसाहेब दानवे भी विचार कर रहे थे।
इधर चिंतामण वनगा के बेटे श्रीनिवास वनगा व प्रफुल्ल वनगा का कहना है उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रावसाहेब दानवे से मिलने के लिए कई बार समय मांगा, लेकिन उन्हें वक्त नहीं दिया गया। वे भाजपा में उपेक्षित हो रहे थे। उन्हें लगातार नजरअंदाज किया जा रहा था। पिता ने भाजपा के लिए जीवन समर्पित कर दिया। नतीजा तो उपेक्षा मिल रही है। लिहाजा उन्होंने मातोश्री जाकर शिवसेना पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे से मुलाकात की। नेक दिल उद्धव से प्रभावित होकर हमने शिवसेना का दामन थाम लिया।
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