भाजपा-शिवसेना में “तीन तलाक” तय 

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मुंबई- अरसे  से चल रही खटपट के बाद अब भाजपा और शिवसेना की दोस्ती टूटने के कगार पर है। संसद में शक्ति प्रदर्शन के दौरान शिवसेना का साथ नहीं मिलने से खफा भाजपा आलाकमान ने एकला चलो की रणनीति पर काम शुरु कर दिया है। ऐसे में अब वो दिन ज्यादा दूर नहीं है, जब भाजपा-शिवसेना गठबंधन टूटने का औपचारिक ऐलान कर दिया जाए। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की रविवार को मुंबई यात्रा के दौरान कमोबेश ऐसे ही संकेत मिले हैं।

 भाजपा की 48 सीटों पर अकेले लडऩे की तैयारी, अविश्वास प्रस्ताव में साथ नहीं मिलने से नाराज भाजपा 

केंद्र और राज्य में सत्तासीन भाजपा और शिवसेना में तीन तलाक तय माना जा रहा है। शिवसेना पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे के तेवरों से भाजपा हाईकमांड नाराज है। अब तक शिवसेना के साथ मित्र धर्म निभा रही भाजपा भी ऐक्शन मूड़ में आ गई है। सूत्रों के मुताबिक रविवार को मुंबई दौरे पर आए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने संंगठन के पदाधिकारियों को अपने दम पर चुनाव लडऩे की तैयारियों में जुट जाने का निर्देश दिया है। शाह ने रविवार को वसंत स्मृति र्कायालय में पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इस बैठक में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और पार्टी प्रदेश अध्यक्ष रावसाहेब दानवे भी मौजूद थे। शाह ने मुख्यमंत्री फडणवीस और प्रदेशाध्यक्ष दानवे को राज्य की सभी 48 संसदीय सीटों पर अपने दम पर चुनाव लडऩे की रणनीति तैयार करने कहा है। इससे अब भाजपा और शिवसेना का गठबंधन का टूटना तय माना जा रहा है। संसद में विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव के दौरान शिवसेना का साथ नहीं मिलने से, भाजपा हाईकमान बेहद नाराज है और शिवसेना सेे नाता तोडऩे के मूड़ में है।
बीते दिनों विपक्ष ने मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया था। अमित शाह ने उद्धव को फोन करके एनडीए गठबंधन का साथ देने का अनुरोध किया था। परंतु उद्धव ने शाह के अनुरोध को कोई अहमियत नहीं दी। वोटिंग के दौरान शिवसेना सांसद गैर-हाजिर रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की झप्पीवाले मामले में भी उद्धव ने राहुल की तारीफ की थी। यह बात भाजपा आलाकमान को नागवार गुजरी है। दोनों दलों में निर्माण हुई कड़वाहट इस कदर बढ़ चुकी है कि अब वे एकला चलो की राह पर हैं।
एनडीए गठबंधन का शिवसेना सबसे पुराना और वफादार घटक दल रहा है। हालांकि शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे के निधन के बाद भाजपा और शिवसेना में तल्खियां बढ़ती गई। कई मुद्दों को लेकर दोनों दलों में मतभेद होते रहे हैं। शिवसेना के मुखपत्र सामना के माध्यम से मोदी और फडणवीस सरकार पर तीर चलाए जाते रहे हैं। पालघर संसदीय सीट के उपचुनाव से दोनों दलों मधुर रिश्तों में और भी कड़वाहट पैदा हुई है। सामना के कार्यकारी संपादक संजय राऊत को दिए गए अपने साक्षात्कार में उद्धव ने मुख्यमंत्री फडणवीस के साम-दाम-दंड-भेद वाले बयान पर तंज कसते हुए, उन्हें चाणक्य नीति के बजाए ग्लोबल नीति समझने की सलाह दी है। उद्धव आगामी चुनाव अपने दम पर लडऩे की घोषणा पहले ही कर चुके हैं। शिवसेना के स्थापना दिवस समारोह में भी अपने दम पर चुनाव लडऩे का राग अलापा गया था।
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