कैंब्रिज एनालिटिका विवाद : ‘महामित्र’ पर लगा डाटा लीक करने आरोप!

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महाराष्ट्र में भी मचा सियासी बवाल, सरकार ने कहा  झूठे हैं आरोप

मुंबई  – कैंब्रिज एनालिटिका प्रकरण ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। इस मामले को लेकर भारत की सियासत में भी घमाशान मचा हुआ है। सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों का व्यक्तिगत डेटा हासिल करके चुनावी फायदा उठाने को लेकर महाराष्ट्र सरकार का मीडिया- महामित्र एप संदेह के घेर में हैं। विपक्ष ने ‘सोशल मीडिया-महामित्र’ उपक्रम में पंजीकरण करानेवालों की गोपनीय जानकारी लीक होने का आरोप लगाया है। हालांकि विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए राज्य सरकार ने दावा किया है कि महामित्र योजना पूरी तरह से सुरक्षित है, इसमें डेटा लीक होने की कोई गुंजाइश नहीं है।

कांग्रेस और शिवसेना ने कैंब्रिज एनालिटिका प्रकरण का हवाला देते हुए  ‘महामित्र एप ‘ पर लोगों के डेटा लीक होने का आरोप लगाया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पू्र्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण का आरोप है जिसतरह नमो एप के जरिए लोगों की जानकारी सार्वजनिक हुई, उसी तरह महामित्र एप के जरिए भी लोगों की जुटाई जा रही निजी जानकारी लिक हो रही है। इसका उपयोग चुनावी फायदे किए लिए किया जा सकता है। अनुलोम निजी धर्मादाय संस्था है, जिसके मालिक अतुल वझे हैं। इस संस्था का पंजीकरण वर्ष 2016 में किया गया है।

महाराष्ट्र सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि महामित्र उपक्रम में 85 हजार लोग शामिल हुए हैं। लोगों की पहचान के लिए केवल मोबाइल नंबर और ई-मेल पता पंजीकरण किया गया है। किसी प्रकार की व्यक्तिगत, निजी अथवा गोपनीय जानकारी नहीं मांगी गई है। महामित्र एप पूरी तरह से सुरक्षित है। लोगों की जानकारी किसी निजी संस्था को देने का सवाल ही नहीं उठता। गृह राज्यमंत्री रणजित पाटिल के मुताबिक महामित्र योजना का मकसद सिर्फ आधुनिक युग में गतिमान संपर्क साधनों से समाज में बुद्धिमान वातावरण निर्माण करने का प्रयास है। सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण महाराष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान देने के लिए बड़े पैमाने में युवा ‘सोशल मीडिया-महामित्र’ में शामिल हुए हैं। योजना में शामिल लोगों के नाम, मोबाइल नंबर और ई-मेल पते की जानकारी सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय के पास सुरक्षित है। इस संबंध में संस्था के साथ पहले ही करार कर लिया गया था। लिहाजा इस डेटा का गैर उपयोग होने की कोई गुंजाइश नहीं है।

नहीं ली गोपनीय जानकारी

गृह राज्यमंत्री के मुताबिक मीडिया, समाजसेवक, कलाकार, उद्यमी आदि ने इस उपक्रम की सराहना की है। इस उपक्रम को ‘डेटा लिक’ होने का संदेह निर्माण करना उचित नहीं है। इस उपक्रम में मोबाइल नंबर और ई-मेल के अलावा कोई डेटा नहीं है। इसके अलावा कोई गोपनीय जानकारी नहीं मांगी गई थी। उपक्रम को लोगों का भरपूर प्रतिसाद मिल रहा है। ‘ॲपब्रेन’ वेबसाइट ने ‘महामित्र’ एप को देश में प्रथम क्रमांक के ‘सोशल’ एप की रैंकिंग दी है। गृह राज्यमंत्री के अनुसार ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इस उपक्रम की जानकारी मुफ्त में पहुंचाने के लिए अनुलोम संस्था की मदद ली गई थी। अनुलोम संस्था के खुद के मोबाइल एप और महामित्र एप से कोई संबंध नहीं है। राज्य के जिलों में इस एप के लिए सरकारी मशीनरी की उपयोग किए जाने के आरोपों में कोई तथ्य नहीं है।

डेटा जुटाने की जवाबदारी प्राइवेट संस्था को क्यों

कांग्रेस और शिवसेना ने कैंब्रिज एनालिटिका प्रकरण का हवाला देते हुए महामित्र एप पर लोगों के डेटा लीक होने का आरोप लगाया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पू्र्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण का आरोप है जिसतरह नमो एप के जरिए लोगों की जानकारी सार्वजनिक हुई, उसी तरह महामित्र एप के जरिए भी लोगों की जुटाई जा रही निजी जानकारी लिक हो रही है। इसका उपयोग चुनावी फायदे किए लिए किया जा सकता है। अनुलोम निजी धर्मादाय संस्था है, जिसके मालिक अतुल वझे हैं। इस संस्था का पंजीकरण वर्ष 2016 में किया गया है।

 

जर्मनी भेजी जा रही जानकारी
पूर्व मुख्यमंत्री चव्हाण ने बताया कि अनुलोम संस्था और महामित्र का कोड एक ही है। इस एप के सदस्यों की जानकारी सीधे अनुलोम संस्था के सर्वर से पश्चिम जर्मनी में जा रही है। उन्होनें सवाल उठाया कि मुंख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का इस संस्था के साथ क्या संबंध है। एप की जानकारी किसी निजी संस्था को देना अर्थात उसका गैर इस्तेमाल हो सकता है। इसका उपयोग राजनीतिक प्रभाव के लिए किया जा सकता है। सरकार इस संबंध में खुलासा करे। शिवसेना प्रवक्ता नीलम गेर्हे ने भी लोगों की गोपनीय जानकारी सार्वजनिक होने की चिंता जताई है। गोर्हे ने कहा कि अमेरिका में फेसबुक उपयोगकर्ताओं की गोपनीय जानकारी कैंब्रिज एनालेटिका के माध्यम से लीक हुई। लोगों के डेटा लीक न हो इसलिए सरकार ठोस कदम उठाए। विधान परिषद के उपसभापति माणिकराव ठाकरे ने राज्य सरकार को आवश्यक सावधानियां बरतने का निर्देश दिया है।

क्या है मामला

दुनिया के सबसे बड़े सोशल मीडिया नेटवर्क फेसबुक पर अंतर्राष्ट्रीय घोटाले का आरोप लगा है। कैम्ब्रिज एनालिटिका ब्रिटेन की डेटा विश्लेषक फर्म है। वर्ष 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति अभियान के लिए काम करने वाली इस कंपनी ने लाखों लोगों के व्यक्तिगत फेसबुक डेटा का फायदा उठाया है। सोशल नेटवर्किंग के कथित तौर पर 50 मिलियन से अधिक फेसबुक उपयोगकर्ताओं के डेटा तक पहुंच हासिल करने के बाद कंपनी ने उसका उपयोग 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान राजनीतिक विज्ञापनों के लिए किया। एफबीआई और अमेरिकी सीनेट मामले की जांच कर रही है। इस मामले को लेकर भारत की सियासत में भी भूचाल मचा हुआ है। भाजपा और कांग्रेस में आरोप-प्रत्यारोप जारी है।


भारत में भी सियासी दलों ने कराए राजनीतिक सर्वे

मामले का खुलासा करनेवाले क्रिस्टोफर वाइली के मुताबिक भाजपा और कांग्रेस सहित अन्य दलों ने कैंब्रिज एनालिटिका की भारत की इकाई से इच्छित नतीजों के लिए चुनावी अध्ययन कराए थे। कैंब्रिज एनालिटिका के सहयोगी संगठन एससीएल इंडिया समूह का नेटवर्क भारत में फैला हुआ है। कंपनी का डेटाबेस 600 से ज्यादा जिलों और 7 लाख गांवों में है। इसका भारत में मुख्यालय गाजियाबाद के इंदिरापुरम में है। इसके अलावा पुणे, पटना, गुवाहाटी, कटक, हैदराबाद, अहमदाबाद, बेंगलुरू, इंदौर और कोलकाता में क्षेत्रिय कार्यालय है।

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