अतिदुर्गम ‘चांदर’ में बिखरी बिजली की चाँदनी  

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– महावितरण की बड़ी उपलब्धी –

मुंबई- पुणे के सहयाद्री पर्वत में बसे अतिदुर्गम इलाके चांदर में बिजली पहुंचाकर महावितरण ने नई उपलब्धी हासिल की है। तहसील वेल्हे की दो बस्तियां बिजली से जगमगा उठी हैं। सात दिनों के अथक परिश्रम के बाद 65 खंबों के सहारे उंचे पर्वत पर बिजली का कनेक्शन पहुंचाया गया है। इससे पहले एलीफेंटा के घरापुरी टापू पर समुद्र में केबल डालकर बिजली पहुंचाई गई थी।
चांदर, पुणे औऱ रायगड की सीमा से सटा हुआ है। दो पहाडि़यों को बीच में चांदर गांव बसा हुआ है। दूसरी 10 घरों की बस्ती है। दूसरी पहाड़ी पर 18 मकानों की बस्ती है। कुल मिलाकर यहां 46 मकान हैं। 
 शिक्षक रजनीकांत मेंढे केवल एक विद्यार्थी को पढ़ाने के लिए दो से ढाई घंटे की यात्रा करके चांदर स्कूल में जाते थे। यह खबरे सुखिर्यों में आने के बाद महावितरण ने इस दुर्गम इलाके में बिजली पहुंचाने की योजना बनाई। महावितरण के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक संजीव कुमार ने इन बस्तियों की जानकारी हासिल की और यहां बिजली पहुंचाने का निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिया।
यह इलाका पुणे औऱ रायगड की सीमा से सटा हुआ है। दो पहाडि़यों को बीच में चांदर गांव बसा हुआ है। दूसरी 10 घरों की बस्ती है। दूसरी पहाड़ी पर 18 मकानों की बस्ती है। कुल मिलाकर यहां 46 मकान हैं।
पुणे से इसकी दूरी 90 किलोमीटर है। पुणे से इस दुर्गम इलाके में पहुंचने के लिए पांच घंटे लगते हैं। आखिरी में 15 किलोमीटर मिट्टी का रास्ता है, जिसके कारण चार पहिया वाहनों से यहां पहुंचना मुश्किल है। बारिश के दिनों में 5 से 6 महीने तक इन बस्तियों से संपर्क टूट जाता है। महावितरण ने इस इलाके में बिजली पहुंचाकर नई मिशाल कायम की है।
चांदर महावितरण के प्रादेशिक निदेशक संजय ताकसांडे के मार्गदर्शऩ में स्थानीय अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर मौका मुआवना किया। इसके बाद 20 अप्रैल से बिजली जोड़ने के काम की शुरूआत हुई। महावितरण ने चुनौती स्वीकार करते हुए 60 कर्मचारियों को काम पर लगाया। सुबह 9 से देर रात तक काम चलता था। पहाड़ी की तलहटी में बसे आडमल से 22 केवी क्षमता का कनेक्शन तकरीबन 900 मीटर तार 29 खंभों के सहारे नए में जोड़ा गया। सात दिनों के अथक परिश्रम के बाद 26 अप्रैल को बिजली बस्ती तक पहुंचाकर कार्यान्वित कर दी गई। इसके बाद पहाड़ी के ऊपरी क्षोर पर अलग-अलग दिशा में स्थित चांदर, डिगेबस्ती और टाकेबस्ती को 440 वोल्ट लघुदाब बिजली से जोड़ा गया। इस बिजली कनेक्शन को जोड़ने के लिए महावितरण ने 20 लाख रुपए खर्च किए हैं।
याद दिला दें आजादी के 70 साल बाद यूनेस्को विश्व विरासत स्थल ‘एलीफेंटा की गुफाएं’ बिजली से रोशन हुईं। समुद्र में 7.5 किलोमीटर लंबी केबल बिछाकर मुंबई से महज 10 किलोमीटर दूरी पर स्थित एलीफेंटा के घरापुरी टापू तक अरब सागर में केबल डालकर बिजली पहुंचाने का साहसिक कार्य किया गया है।
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