भाजपा को रोकने कांग्रेस ने की महागठबंधन की जोरशोर से तैयारी

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मुंबई- आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव के लिए समान विचारधारावाली पार्टियों से मिलकर महागठबंधन तैयार करने की योजना कांग्रेस ने बनाई है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अशोक चव्हाण ने कहा है समान विचारधारावाले दलों को साथ लेकर चलना पार्टी की नीति रही है। आगामी चुनाव में भी पार्टी इस नीति पर अमल करेगी। शनिवार को हुई पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में समान विचारधारा वाली पार्टियों से चुनवी गठजोड़ के प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई।
तकरीबन पांच घंटे तक चली मैराथन बैठक में संगठन की भविष्य में दिशा और आगामी चुनाव के लिए सीटों के संबंध में समीक्षा की गई। चव्हाण ने कहा कि सांप्रदायिक और जातिवादी विचारधारा रखनेवाली भाजपा को पराजित करने के लिए सभी धर्मनिरपेक्ष दलों को एकजुट हो जाना चाहिए।
चव्हाण की अगुवाई में हुई बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद थे। तकरीबन पांच घंटे तक चली मैराथन बैठक में संगठन की भविष्य में दिशा और आगामी चुनाव के लिए सीटों के संबंध में समीक्षा की गई। चव्हाण ने कहा कि सांप्रदायिक और जातिवादी विचारधारा रखनेवाली भाजपा को पराजित करने के लिए सभी धर्मनिरपेक्ष दलों को एकजुट हो जाना चाहिए। कर्नाटक की तरह सभी समान विचारधारा वाले दल साथ आएं, तो भाजपा को सत्ता से दूर रखा जा सकता है। सभी समान विचारधारा वाली पार्टियों को एक साथ लाकर भाजपा के खिलाफ महागठबंधन तैयार करने के लिए कांग्रेस पहल करेगी। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मंगलवार यानी 12 जून को मुंबई आनेवाले हैं। इस बैठक की रिपोर्ट राहुल को देकर विस्तृत बातचीत की जाएगी।
चव्हाण ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को जान का खतरा होने की खबरें आ रही हैं। पत्र दिखाए जा रहे हैं। भाजपा प्रवक्ता इस संबंध में प्रेस वार्ता कर रहे हैं, जबकि सरकार की ओर से कोई अधिकारिक तौर पर बोल नहीं रहा है। देश के गृहमंत्री, राज्य के पुलिस महानिदे्शक, पुणे पुलिस आयुक्त कोई आधिकरक तौर पर कुछ नहीं बोल रहा है। लेकिन भाजपा इस गंभीर मसले पर राजनीति खेल रही है। मामले की जांच होने से पहले ही मावावादियों से संबंध होने का निष्कर्ष निकाल करके, दलित आंदोलन को बदनाम करने प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए चव्हाण ने कहा कि सरकार की जिद्द के कारण एसटी कर्मचारियों की हड़ताल भड़क उठी है। आंदोलनकारी कर्मचारियों और संगठनों से चर्चा कर मसले का हल निकालने के बजाए, सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई करके अन्याय कर रही है। सरकार की एक तरफा वेतन वृदि्ध की घोषणा से कर्मचारी नाराज हैं। एसटी कर्मचारियों की हड़ताल से जनता को परेशानी उठानी पड़ रही है। सरकार जल्द संबंधितों के साथ चर्चा करके मसले का हल निकाले।
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