आलीशान बंगला बना सहकारिता मंत्री देशमुख के लिए मुसीबत

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मुंबई- प्रदेश के सहकारिता मंत्री सुभाष देशमुख मुश्किलों में घिर गए हैं। सोलापुर मनपा आयुक्त अविनाश ढाकणे द्वारा बांबे हाईकोर्ट में रिपोर्ट पेश की गई है, जिसमें कहा गया है सोलापुर में बनाया गया देशमुख का बंगला गैर-कानूनी है। यह बंगला अग्निशमन दल के लिए आरक्षित जमीन पर बनाया गया है। इधर भाजपा की सहयोगी पार्टी शिवसेना सहित विपक्षी दलों ने देशमुख के इस्तीफे की मांग की है।
देशमुख के मुताबिक रिपोर्ट पूरी तरह पढ़ ली जाए। यह मनपा की गलती है। उन्होंने नकद पैसे भरकर नियमानुसार अनुमति ली है। तत्कालीन मनपा आयुक्त ने अनुमति किस आधार पर दी, यह जांच का विषय है।
देशमुख ने सफाई दी है इससे पहले के मनपा आयुक्त ने बंगला बनाने की अनुमति प्रदान की थी। वे हर जांच के लिए तैयार हैं। उन्हें न्याय देवता पर पूरा भरोसा है। उन्होंने नियमों का उल्लंघन नहीं किया है और न ही पद का दुरूपयोग किया है। वे दोषी पाए जाते हैं तो अपना बंगला तोड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस उन्हें आदेश देते हैं, तो वे मंत्री पद छोड़ने में जरा सा भी विलंब नहीं लगाएंगे। देशमुख के मुताबिक रिपोर्ट पूरी तरह पढ़ ली जाए। यह मनपा की गलती है। उन्होंने नकद पैसे भरकर नियमानुसार अनुमति ली है। तत्कालीन मनपा आयुक्त ने अनुमति किस आधार पर दी, यह जांच का विषय है। मामले की फिर से जांच करने की जरूरत है। न्यायपालिका का जो फैसला होगा, उसे वे सहर्ष स्वीकार करेंगे।
इधर शिवसेना सांसद अरविंद सावंत, विधान परिषद में विपक्ष के नेता धनंजय मुंडे, कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत और समाजसेविका अंजलि दमानिया ने देशमुख के इस्तीफे की मांग की है। अरविंद सावंत ने मनपा की रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि देशमुख को मंत्री पद छोड़ देना चाहिए। सचिन सावंत ने कहा कि मंत्रिमंडल से देशमुख को हटाया जाए। सहकारिता मंत्री ने आरक्षित जमीन पर अवैध तरीके से आलीशान बंगला बनाया है। यह फडणवीस सरकार के भ्रष्ट कामकाज का ज्वलंत उदाहरण है। भ्रष्टाचार का आरोप लगने के बाद भी देशमुख मंत्रिमंडल में बने हुए है। सेबी ने भी उन्हें दोषी ठहराया है। सावंत ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अवैध निर्माण करनेवालों बिल्डरों के खिलाफ मकोका के तहत कार्रवाई करने की घोषणा की थी। अब देशमुख के विरूद्ध मकोका के अंतर्गत कारर्वाई होनी चाहिए।
धनंजय मुंडे ने कहा कि एकनाथ खड़से को जो न्याय दिया गया वही न्याय देशमुख को भी मिलना चाहिए। मामला बेहद संगीन है। बंगले को गिराने के साथ ही मुंडे ने देशमुख को मंत्री पद से हटाने की मांग की है। मुंडे ने कहा कि यह मसला कोर्ट में नहीं जाता तो सरकार कभी न्याय नहीं करती। अंजलि दमानिया के मुताबिक पहले देशमुख मंत्री पद से इस्तीफा दें, इसके बाद न्याय प्रकिया के सामने जाएं। यदि वे निर्दोष साबित होते हैं तो फिर मंत्रिमंडल में शामिल हो सकते हैं।
क्या है मामला 
सोलापुर मनपा आयुक्त ने 26 पन्नों की रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश की है। जिसमें आरक्षित जमीन पर देशमुख का बंगला बनाए जाने का उल्लेख है। देशमुख ने दो एकड़ जमीन में 22 हजार 243 वर्ग फुट का आलीशान बंगला बनवाया है। उन्होंने 9425 वर्ग फुट की अनुमति ली है। लेकिन उससे तीन गुना जमीन में बंगले का निर्माणकार्य किया गया है। पूरी दो एकड़ जमीन दमकल विभाग के लिए आरक्षित थी। इसके विरोध में सामाजिक कार्यकर्ता महेश
कब-कब मांगी अनुमति 
चव्हाण ने 10 अगस्त 2016 को हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। वर्ष 2001 में मनपा ने अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद मनपा ने साल 2004 में देशमुख को वन बीएचके निर्माणकार्य की सशर्त अनुमति दी थी। इसके बाद वर्ष 2011 में फिर से देशमुख ने संशोधित निर्माणकार्य का आवेदन किया था। उसे भी मनपा ने सशर्त मंजूर कर लिया था। लेकिन आरोप है देशमुख ने मंजूरी से ज्यादा जमीन पर बंगले का निर्माणकार्य किया है।
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