भ्रष्टाचार पर नकेल, सरकारी ख़रीद अब ‘GeM’ से ऑनलाइन!

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मुंबई- भष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) से करार किया है। अब सरकारी विभागों में खरीदी जानेवाली सभी वस्तुएं जेम वेब पोर्टल से ही खरीदी जाएंगी। दावा है कि खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता होने के साथ ही सरकार को 10 से 15 प्रतिशत कम कींमत पर वस्तुएं मिल सकेंगी। पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त खरीदी के लिए राज्य सरकार ने यह अहम कदम उठाया है। 
खरीदी प्रक्रिया सक्रिय और सहज होगी, जिससे वस्तुएं वाजिब दर पर सरकारी विभागों को मिल सकेंगी। जेम की ओर से राज्य सरकार को पोर्टल के इस्तेमाल के लिए तकनीक सहयोग और प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। 
 
राज्य सरकार के सभी विभागों और कार्यालयों के लिए बंधनकारक होगा कि केवल जेम वेब पोर्टल के जरिए ही वस्तुएं खरीदी जाएं। महाराष्ट्र सरकार और गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) के बीच बुधवार को करार किया गया। समझौते पर महाराष्ट्र सरकार के उद्योग विभाग की ओर से विकास आयुक्त डॉ. हर्षदीप कांबले और भारत सरकार की तरफ से गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी एस.सुरेशकुमार ने हस्ताक्षर किया। खरीदी प्रक्रिया सक्रिय और सहज होगी, जिससे वस्तुएं वाजिब दर पर सरकारी विभागों को मिल सकेंगी। जेम की ओर से राज्य सरकार को पोर्टल के इस्तेमाल के लिए तकनीक सहयोग और प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। 
 
डॉ. कांबले के मुताबिक मौजूदा स्थिती में इस पोर्टल पर तकरीबन 46,804 विक्रेताओं की 4,79,000 वस्तुएं खरीदी के लिए उपलब्ध हैं। केंद्र सरकार ने गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस को विकसित किया है। इस तकनीक को अपनाने के बाद महाराष्ट्र देश का 22 वां राज्य बन गया है। उद्योग, ऊर्जा और श्रम विभाग ने पोर्टल को स्वीकृत करने की मंजूरी दे दी है। अब तक राज्य सरकार ने करीब 143 करोड़ रुपए की सामान खरीदी इस पोर्टल के माध्यम से की है। यह प्रणाली नई होने से इसका प्रशिक्षण उद्योग विभाग के मार्फत विभिन्न स्तरों पर दिया जाएगा। 
 
महाराष्ट्र प्रदेश का अभिनंदन करते हुए जेम के एस.सुरेशकुमार ने बताया कि अब तक 21 राज्यों ने करार पर हस्ताक्षर किए हैं। अब महाराष्ट्र ने भी हस्ताक्षर कर दिया है। संपर्करहित, नकदीरहित और कागजरहित होनेवाले इस लेनेदेन से विक्री- खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता आई है। इसमें शामिल होने के लिए विक्रेता को किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं देना होता। सामान पहुंचने के बाद उसका मूल्य 10 दिन के भीतर विक्रेता के खाते में जमा हो जाता है। इस पोर्टल से लघु व मध्यम उद्योगों को भी सरकार के साथ व्यवहार करने में सुलभ हुआ है। संशोधित खरीदी नीति लागू कर दी गई है। सचिव समूह की स्थापना की गई थी। इस सचिव समूह द्वारा खरीदी के संबंध में दी गई सिफारिशों के आधार पर DGS&D की मौजूदा दर करार को जेम पोर्टल में रुपांतरित किया गया है। जेम पोर्टल फ्लिपकार्ट व ॲमेजॉन जैसा वेब पोर्टल है। 
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