राजनीतिक पार्टी बनाने को लेकर, मराठा क्रांति मोर्चा में टकराव

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मुंबई-  मराठा ठोक क्रांति मोर्चा ने राजनीतिक पार्टी बनाने की खबरों का खंडन किया है। क्रांति मोर्चा के समन्वक आबासाहेब पाटिल ने कहा है सियासी पार्टी गठन करने का हमारा कोई इरादा नहीं है। मराठा समुदाय भी इससे सहमत नहीं है। कुछ स्वयंघोषित समन्वयकों ने पार्टी बनाने की घोषणा की है, जिसका हम कड़ा विरोध करते हैं। 

सियासी पार्टी गठन करने का हमारा कोई इरादा नहीं – आबासाहेब पाटिल, क्रांति मोर्चा समन्वक

आबासाहेब पाटिल के मुताबिक स्वयंघोषित समन्वयक मराठा समाज को गुमराह कर रहे हैं। हम कोई राजनीतिक हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करेंगे और किसी भी राजनीतिक पार्टी का सहयोग नहीं करेंगे। सुरेश पाटिल ने मराठा क्रांति पार्टी बनाने की घोषणा की है। परंतु इसे मराठा समाज की मान्यता नहीं है। यदि उन्हें राजनीतिक दल बनाना है तो पहले समाज के लोगों से विचार-विमर्श करना चाहिए था। जिले-जिले में जाकर बैठकें लेकर सबको विश्वास में लेना था। मराठा समाज में फूट डालनेवाले स्वयंघोषित समन्वयकों से सावधान रहने की जरूरत है। लोगों को गुमराह करनेवालों को जल्द सबक सिखाया जाएगा। आबासाहेब पाटिल के मुताबिक मराठा क्रांति मोर्चा की ओर से जल्द तुलजापुर में राज्यस्तरीय बैठक बुलाई जाएगी। इस बैठक में क्रांति मोर्चा की अगली दिशा-दशा के साथ संगठन की आचारसंहिता तय की जाएगी। जो सही में समन्वयक हैं उन्हें पहचान पत्र जारी किए जाएंगे। प्रमुख समन्वयक, राज्यस्तरीय. जिलास्तरीय, तहसीलस्तरीय समन्वयकों को पहचान पत्र दिया जाएगा। ताकि समाज के लोग गुमराह न हो सकें। संगठन की आचारसंहिता है। जिन्हें मराठा समाज के लिए काम करना है, वे किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं ले सकते। पहले संसद, विधायक पद से इस्तीफा दें इसके बाद समाज के लिए काम करें।
 
आबासाहेब ने कहा कि मराठा आंदोलन में सांसदों और विधायकों को स्थान नहीं है। फिर भी कुछ स्थानों पर सांसद और विधायक शामिल हो गए और अपने लोगों को मोर्चे में घुसा दिया। उन्होंने मराठा आंदोलन को हिंसक बनाकर बदनाम करने का काम किया। रमेश कोरे पाटिल ने बताया कि मराठा विद्यार्थियों को फीस में 50 प्रतिशत छूट देने के राज्य सरकार के शासनादेश को शैक्षणिक संस्थान मानने को तैयार नहीं है। इसके लिए शैक्षणिक संस्थानों के खिलाफ आंदोलन छेड़ा जाएगा। आंदोलन के दौरान मराठा युवकों पर दर्ज किए गए आपराधिक मामले वापस लिए जाने चाहिए। आंदोलन के दौरान हिंसा फैलानेवालों की सीबीआई जांच कराई जाए। पुलिस असली गुनाहगारों के गिरफ्तार करे। 
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