जरुरत पड़ी तो होगा 1992 जैसा आंदोलन – आरएसएस

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मुंबई- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर कार्यवाह सुरेश जोशी उर्फ भैयाजी ने  भाईंदर में स्थित केशव श्रृष्टि के रामभाऊ ह्मालगी प्रबोधिनी सभागृह में अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की तीन दिवसीय बैठक के बाद पत्रकारों को बताया कि राम मंदिर के निर्माण में कोर्ट के निर्णय से हो रही देरी देश की जनता का अपमान है। संघ हमेशा कोर्ट का सम्मान करता है इसीलिए पिछले तीन दशक से फैसले का इंतजार कर रहा है। इस मामले में अगर जरुरत पड़ी तो 1992 जैसा आंदोलन खड़ा किया जाएगा। इस अवसर पर अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार, अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर उपस्थित थे।

राममंदिर निर्माण में देरी देश की जनता का अपमान – भैयाजी

भैया जी जोशी ने कहा कि अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में सहभागी होने के लिए भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह आए थे। उनके साथ कुछ मुद्दों पर निजी बातें हुई ,लेकिन जरुरी नहीं कि निजी बातें बताई जाएं। भैयाजी जोशी ने कहा कि रामलला सबके मन में हैं, हृदय में हैं। सभी लोग 30 सालों से चाहते हैं कि राममंदिर बने। इस मामले में कोर्ट को हिंदू भावनाओं को समझ कर न्याय देना चाहिए।
भैयाजी जोशी ने कहा कि २०१० में लखनऊ बेंच ने निर्णय दिया था। इस निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। पिछले ७ वर्षों से यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में प्रलंबित है। भैयाजी जोशी ने कहा कि इस मामले की २९ अक्टूबर को सुनवाई की गई और बाद अनिश्चित काल के लिए टाल दिया गया है। सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि उसकी प्राथमिकताएं अलग- अलग हैं। भैया जी ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के इस बात से उन्हें बहुत वेदना हुई है। करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा यह मुद्दा सर्वोच्च न्यायालय की प्राथमिकता में नहीं है, यह वेदनाकारक तो है ही, इससे हिंदू समाज अपमानित महसूस कर रहा है। सर्वोच्च न्यायालय को इस विषय को अग्रक्रम में लेना चाहिए। इस पर कोर्ट को फिर से विचार करना चाहिए। हम संविधान का सम्मान करते हैं। न्यायालय का भी दायित्व है कि वह जनता की भावनाओं का आदर करें।
इस अवसर पर पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए भैयाजी जोशी ने कहा कि इस मामले में अध्यादेश लाने का काम सरकार का है। अध्यादेश की मांग जिसने भी की है,यह उनका अधिकार है और अब सरकार को इस पर निर्णय लेना है। उन्होंने कहा कि नरसिंहाराव सरकार के समय शपथपत्र सुप्रीम कोर्ट को सौपा गया था कि यह जगह रामजन्मभूमि की ही है और इस जमीन को हिंदुओं को सौपा जाना चाहिए। पुरातत्व विभाग की ओर  की गई खुदाई में भी यहां पहले मंदिर होने के सबूत मिले हैं। पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए भैयाजी जोशी ने कहा कि राममंदिर का निर्माण करने में देरी टाईटल को क्लीयर करने के लिए हो रही है। सरकार ने स्वीकार किया है कि यह रामजन्मभूमि ही है। सर्वोच्च न्यायालय की ओर से देशवासियों की भावना को समझते हुए जल्द निर्णय देना जरुरी है। अगर इस मामले में जरुरत हुई तो १९९२ के जैसा आंदोलन भी खड़ा किया जाएगा।
राहुल गांधी के संदर्भ में पूछे गए सवाल पर भैया जी जोशी ने कहा कि उनके व्यक्तव्य को महत्व देना ही सोचने का विषय है। उन्हें गंभीरता से लेने की जरुरत ही नहीं है। शिवसेना- भाजपा के संबंधों पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए भैयाजी जोशी ने कहा कि दोनों खुद तय करें। राममंदिर के मुद्दे पर शिवसेना उनके साथ है। इसी प्रकार राफेल संबंधी प्रश्र का जवाब देते हुए भैयाजी जोशी ने कहा कि यह मुद्दा सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, इसलिई इसकी चर्चा कम से कम हो तो ज्यादा बेहतर होगा। इसी प्रकार सबरीमाला से संबंधित सवाल का जवाब देते हुए भैयाजी जोशी ने कहा कि पूजा अर्चना में महिलाओं का समान अधिकार है। पति-पत्नी एकसाथ बैठकर पूजा अर्चना करते हैं। सबरीमाला मंदिर में भी अगर महिलाओं के प्रवेश तक ही प्रश्र सीमित रहता तो वह उसका समर्थन करते थे। इसका कारण पूजा अर्चना में महिलाओं का समान अधिकार है। लेकिन कुछ मंदिरों के भी कुछ अलग नियम रहते हैं। समाज मान्यताओं पर चलता है। उनके साथ भी चर्चा की जानी चाहिए थी। समाज सिर्फ कानून पर ही नहीं चलता मान्यताओं पर भी चलता है, इसलिए संबंधित लोगों से चर्चा होनी चाहिए थी।
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