कारोबारियों ने की ई कॉमर्स के लिए रेगुलेटरी अथोरिटी गठित करने मांग 

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मुंबई- ई कॉमर्स व्यापार पर नीति को लेकर देश के विभिन्न प्रमुख संगठनों ने कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स(कैट) के बैनर तले रेगुलेटरी अथोरिटी गठित करने मांग की है ।

वर्ष 2016 के प्रेस नोट 3 को सख्ती से लागू करने की माँग 

कारोबारियों के मुताबिक  वर्ष 2016 के प्रेस नोट 3 को सख्ती से लागू किया जाए । अगर कोई कंपनी  उसका उल्लंघन करती है, तो तत्काल दंडित  किया जाए। ई कॉमर्स की देखरेख और नियंत्रित करने के लिए एक रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन किया जाए। कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल के मुताबिक  एक अनुमान के अनुसार वर्ष 2022 तक देश में डिजिटल इकॉनमी एक ट्रिलियन डॉलर की हो जाएगी। वर्ष 2030 तक कुल अर्थ व्यवस्था काआधा हिस्सा 50 प्रतिशत बन जाएगी।ऐसे में ई कॉमर्स के लिए एक ठोस, समग्र एवं मजबूत नीति का होना बेहद जरूरी है।घरेलू व्यापार के हित सुरक्षित हों, आधुनिक टेक्नोलॉजी का समावेश हो तथा डाटा सुरक्षा का मजबूत तंत्र हो । दिल्ली में बुधवार को व्यापारियों की गोलमेज परिषद बुलाई गई थी । इसमें व्यापार, उद्योग, ट्रांसपोर्ट, किसान, लघुउद्योग, उपभोक्ता संगठनों के अलावा ई कॉमर्स कंपनियों,आर्थिक विश्लेषकों, चिंतकों आदि ने भाग लिया ! विशेष रूपसे स्वदेशी जागरण मंच, आल इंडिया ऑनलाइन वेंडर्सअसोसिएशन, इंडियन सेलुलर असोसिएशन, फोरम अगेंस्टएफटीए , आईटी फॉर चेंज आदि शामिल थे।सम्मेलन में पारित एक सर्वसम्मत प्रस्ताव में सरकार से मांग की गई है ।
खंडेलवाल के मुताबिक ई कॉमर्स कंपनियों के लिए सीमित इन्वेंटरी की अनुमति किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जा सकती। क्योंकि ई कॉमर्स कंपनियां केवल टेक्नोलॉजी प्रदाता हैं।उनका इन्वेंटरी से कोई लेना देना नहीं है।यदि ऐसा हुआ तो ई कॉमर्स का बुनियादी ढांचा ही हिल जाएगा ! उन्होंने कहा कि ” बल्कपरचेस” बहुत ही भ्रामक शब्द है, जिसे सही तरीके से परिभाषित करना जरूरी है । ई कॉमर्स कंपनियां किसी भी तरह का कोई डिस्काउंट नहीं दे सकती। यह प्रावधान भी नीति में किया जाना आवश्यक है।क्योंकि वो ई कॉमर्स पर बिकनेवाले सामान की मिलकियत उनकी नहीं है ! प्रत्येक ई कॉमर्स कम्पनी को अथॉरिटीज के साथ पंजीकृत होना जरूरी होना चाहिए !
अनेक वक्ताओं की राय है कि ई कॉमर्स की कोई सर्वमान्य परिभाषा नहीं है। ई कॉमर्स बाज़ार का कोई अधिकृत आकंड़ा न होने से इस व्यापार में विसंगतियों और मनमानी का बोलबाला है ।खंडेवाल बताते हैं कि  डेटा का बहुत ही महत्व है, लेकिन अभी तक डेटा को लेकर बेहद उदासीनता है। दूसरी तरफ डिजिटल वित्तीय ढांचे को भी नए सिरे से बनाने की जरूरत है । इसी प्रकार छोटे व्यापरियों को ई कॉमर्स पर व्यापार के बड़े और निष्पक्ष अवसर मिले यह भी जरूरी है !
कई व्यापारिक वक्ताओं का मत है कि रूपए कार्ड ऑनलाइन रूप में पूरी तरह एक फेल सिस्टम है !इसकी जगह सरकार द्वारा वर्ष 2017 में जारी किया गया भारत क्यू आर को ई कॉमर्स में डिजिटल भुगतान के लिए अपनाते हुए प्रोत्साहित करना चाहिए।वहीँ डिजिटल क़र्ज़ देने के लिए भी एक सुदृढ़ तंत्र विकसित होना जरूरी है । कैट सिफारिशों का एक श्वेत पत्र जारी करेगी । कैट ने  छोटे व्यापारियों को ई कॉमर्स से जोड़ने की मांग की है ।
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