” हमें न पढ़ाओ धर्मनिरपेक्षता का पाठ “

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मुंबई- पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री और एनसीपी के मुखिया शरद पवार ने भारिप बहुजन महासंघ के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर के उस बयान पर पलटवार किया है, जिसमें उन्होंने एनसीपी से गठबंधन करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि एनसीपी धर्मनिरपेक्ष पार्टी नहीं है। इसके जवाब में पवार ने पूछा है यदि एनसीपी धर्मनिरपेक्ष पार्टी नहीं थी तो अकोला में प्रकाश आंबेडकर ने एनसीपी का समर्थन क्यों लिया था। पवार ने कहा भजापा को लाभ पहुंचानेवाले हमें धर्मनिरपेक्षता न सिखाएं। 

शरद पवार का प्रकाश आंबेडकर पर पलटवार

पवार ने कहा कि अकोला में समर्थन लेने पर पहले आंबेडकर को धर्मनिरपेक्षता का ख्याल नहीं आया। मैं उन दिनों प्रचार नहीं करने गया था। आंबेडकर को मदद करनेवाले स्थानीय एनसीपी कार्यकर्ता ही थे। पवार ने आंबेडकर को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कुछ अर्से पहले ईशान्य मुंबई में हमारे उम्मीदवार को हराने के लिए प्रकाश आंबेडकर की पार्टी ने नीलम गोर्हे को चुनाव उतारा था। इसका लाभ भाजपा उम्मीदवार दिवंगत प्रमोद महाजन को हुआ था। उन दिनों परोक्ष रूप से भाजपा की मदद करनेवाले लोग हमें बता बता रहे हैं कौन धर्मनिरपेक्ष है और कौन नहीं है। याद दिला दें कि बीते दिनों प्रकाश आंबेडकर ने कहा था कि शरद पवार धर्मनिरपेक्ष हैं लेकिन उनकी एनसीपी धर्मनिरपेक्ष पार्टी नहीं है। संभाजी भिड़े की पैरवी करनेवाले लोग एनसीपी में हैं। एनसीपी नेता उदयनराजे भोसले संभाजी भिडे का समर्थन करते हैं। लिहाजा हम एनसीपी से गठबंधन नहीं कर सकते। कांग्रेस से चुनावी गठजोड़ करने में हमें कोई परहेज नहीं है। हम आखिरी क्षण तक गठबंधन के लिए कांग्रेस के प्रस्ताव का इंतजार करेंगे। प्रकाश आंबेडकर के इस बयान पर पवार ने तीखे तंज कसे हैं। 
 
पवार ने इस दौरान सरसंघ चालक मोहन भागवत की भी आलोचना की। पवार ने कहा कि ईसाई हो या मुस्लिम सभी भारत के अंग हैं। हमारे जितना उन्हें भी अधिकार है। भारत में जन्म लेते ही वे भी उतने ही देश के हिस्सेदार हैं। इससे पहले भागवत ने कहा था कि मुस्लिमों के बिना हिंदुत्व अधुरा है। 
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