ई कॉमर्स पालिसी को न लाने पर व्यापारियों में रोष 

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मुंबई- कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने सरकार द्वारा  ई कॉमर्स पालिसी न लाने के फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया है। कैट की ओर से कहा गया है कि यह एक बेहद ही घातक कदम होगा जिसका सीधा सन्देश जायेगा की सरकार बहुराष्ट्रीय कंपनियों एवं ऑनलाइन कंपनियों के दबाव के आगे झुक गई है। कंपनियां भारत के रिटेल व्यापार को अपने निहित स्वार्थों के कारण एक खुला मैदान बने रहने देना चाहती है ।

कैट के मुताबिक देश के व्यापारी इस पर अपना कड़ा विरोध दर्ज़ कराएंगे

कैट के मुताबिक देश के व्यापारी इस पर अपना कड़ा विरोध दर्ज़ कराएंगे और सरकार को बिना किसी दबाव के पालिसी को तुरंत लाना चाहिए। पालिसी का न आना देश के व्यापारियों को कतई स्वीकार नहींहै । केंद्रीय वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु को बुधवार को भेजे पत्र में कैट ने कहा कि भारतीय ई कॉमर्स बाज़ार बहुत तेजी से साइजऔर स्केल में फ़ैल रहा है जिसको खुला नहीं छोड़ा जा सकता और इसलिए ई कॉमर्स के लिए एक निश्चित पालिसी और एक रेगुलेटरी अथॉरिटी के गठन की बेहद आवश्यकता है । कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी.भरतिया और महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि ई कॉमर्स पर पालिसी पहले ही तीनसाल से अधिक समय की देर से आ रही है और यदि इस पालिसी को नहीं लाया गया तो यह ई कॉमर्स में स्वस्थ व्यापार के लिए एक बड़ा झटका होगा। ई कॉमर्स कंपनियों को लागत से भी कम मूल्य पर माल बेचने, भारी डिस्काउंट देने तथा एकअसमान प्रतिस्पर्धा का वातावरण बनाने में मदद मिलेगी और वोखुल कर अपना खेल खेलेंगे।अनेक वर्षों से देश के ई कॉमर्स व्यापार में अनेक प्रकार की विसंगतियां और खराबियां ई कॉमर्स पोर्टल द्वारा अपने फायदे के लिए की गई हैं, जिसके कारण से ई कॉमर्स व्यापार बुरी तरह विषाक्त हो गया है।
ई मार्केटर रिसर्च संस्था की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में ईकॉमर्स व्यापार वर्ष 2018 में 31 प्रतिशत की दर से वृद्धि कर लगभग 32 .7  बिलियन डॉलर का हो जाएगा।  वर्ष 2026 तक इसके 200 बिलियन डॉलर प्रतिवर्ष होने का अनुमान है। यह वृद्धि देश में इंटरनेट और स्मार्टफोन के तेजी से बढ़ने के कारण हो रही है । इंडियन इक्विटी ब्रांड फाउंडेशन की एक रिपोर्ट के अनुसार देश में इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों के संख्या वर्ष 2017 में 445 .96  मिलियन से बढ़कर वर्ष 2021 तक 829 मिलियन हो जाएगी ।
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