दस हज़ार टन ई – वेस्ट की रि-साइक्लिंग के लिए मात्रा एक प्लांट !

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भोपाल, मध्य प्रदेश में दस हज़ार टन से ज़्यादा ए-वेस्ट निकल रहा है जिसमें से मात्रा दस प्रतिशत ही रिसाइकल हो पाता है और इसका मुख्य कारण  प्रदेश में मात्रा एक रिसाइकलिंग प्लांट का होना है जो इंदौर में स्थित है. एकलौते भोपाल शहर से 432 मेट्रिक टन ई-वेस्ट निकलता है।  प्रमुख सचिव एवं म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष श्री अनुपम राजन की अध्यक्षता में गत दिवस एप्को में मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा  ई-वेस्ट प्रबंधन पर कार्यशाला आयोजित की गयी।

अत्यधिक जनसंख्या होने के कारण भारत विश्व के 5 प्रमुख ई-वेस्ट उत्पादक देशों में शामिल है। कम्प्यूटर उपकरणों से लगभग 70 प्रतिशत, दूरसंचार उपकरणों से 12, चिकित्सा उपकरणों से 8 और अन्य विद्युत उपकरणों से लगभग 7 प्रतिशत, देश के शासकीय, निजी क्षेत्र, प्रमुख निजी कम्पनियों से 75 और घरेलू उपयोग से लगभग 16 प्रतिशत ई-वेस्ट उत्पन्न होता है। देश में मुम्बई सबसे बड़ा ई-वेस्ट उत्पादक शहर है।

ई-वेस्ट प्रबंधन के मार्ग का सबसे बड़ा रोड़ा रिसाइकलिंग प्लांट्स और कलेक्शन सेंटर्स की कमी है. मध्य प्रदेश जैसे विस्तृत राज्य में मात्रा एक रिसाइक्लिंग यूनिट का होना इस बात का ध्योतक है की मात्रा कार्यशालाओं के आयोजनों से कुछ नहीं होगा, इन्फ़्रस्ट्रक्चर भी सरकार को प्रदान करना पड़ेगा नहीं तो ई-वेस्ट कबाड़ियों के हवाले होता रहेगा और कबाड़ी अनुपयोगि ई-वेस्ट को ज़मीन में गाड़ते रहेंगे. जो पर्यावरण के लिए कई मायनों में घातक होगा.

प्रदेश में ई-वेस्ट प्रबंधन के लिये विशेषज्ञों, शिक्षण संस्थाओं, गैर-सरकारी एवं प्रशासनिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों की राज्य-स्तरीय सलाहकार समिति गठित की जायेगी। समिति समय-समय पर प्रदेश में ई-वेस्ट प्रबंधन के लिये मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और शासन को सलाह देगी। प्रमुख सचिव एवं म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष श्री अनुपम राजन ने यह जानकारी आज एप्को में बोर्ड द्वारा ई-वेस्ट प्रबंधन पर आयोजित कार्यशाला में दी। कार्यशाला में प्रदेश के प्रमुख शिक्षण संस्थान, बैंक, शासकीय विभाग एवं उद्योगों के प्रतिनिधि शामिल हुए। जाने-माने ई-वेस्ट विशेषज्ञों ने ई-वेस्ट प्रबंधन, देश और प्रदेश में लागू अधिनियमों और नियमों की जानकारी दी।

श्री राजन ने कहा कि हमें अभी से ही ई-वेस्ट प्रबंधन की चिंता करनी होगी, ताकि ई-वेस्ट उत्पादक शहर को होने वाली चुनौतियों का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि अत्यधिक जनसंख्या होने के कारण भारत विश्व के 5 प्रमुख ई-वेस्ट उत्पादक देशों में शामिल है। कम्प्यूटर उपकरणों से लगभग 70 प्रतिशत, दूरसंचार उपकरणों से 12, चिकित्सा उपकरणों से 8 और अन्य विद्युत उपकरणों से लगभग 7 प्रतिशत, देश के शासकीय, निजी क्षेत्र, प्रमुख निजी कम्पनियों से 75 और घरेलू उपयोग से लगभग 16 प्रतिशत ई-वेस्ट उत्पन्न होता है। देश में मुम्बई सबसे बड़ा ई-वेस्ट उत्पादक शहर है।

सदस्य सचिव श्री ए.ए. मिश्रा ने कहा कि मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड देश में ई-वेस्ट सर्वेक्षण कराने वाला देश का पहला बोर्ड है। श्री मिश्रा ने प्रतिभागियों को प्रदेश में पॉलिथिन कैरी-बैग प्रतिबंध और देश एवं प्रदेश के विभिन्न नियम-अधिनियम की जानकारी दी। प्रतिभागियों से कहा गया कि प्रदेश में यदि कोई कैरी बैग बनाता हुआ मिले, तो उसकी सूचना तत्काल बोर्ड को दें, ताकि उसके विरुद्ध कार्यवाही की जा सके। प्रदेश में प्लास्टिक कैरी बैग पर प्रतिबंध है, पैकेजिंग सामग्री पर नहीं। यदि सामान चारों तरफ से सील है, तो कैरी बैग की श्रेणी में नहीं आयेगा। यदि तीन तरफ से सील है, तो कैरी-बैग की श्रेणी में होने के कारण प्रतिबंध का उल्लंघन माना जायेगा।

बोर्ड के पूर्व निदेशक डॉ. डी.डी. वासु ने देश में ई-वेस्ट संबंधित कानून और नियमों की जानकारी, विशेषज्ञ श्री अमित जैन ने देश में ई-वेस्ट प्रबंधन की स्थिति और प्रदेश की ई-वेस्ट रि-साइक्लीनिंग इकाई के प्रमुख डॉ. फजल हुसैन ने पर्यावरण मित्र ई-वेस्ट प्रबंधन के लिये उपलब्ध तकनीक और श्री एच.के. शर्मा ने प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016 के अंतर्गत प्लास्टिक उत्पादक और ब्रॉण्ड ओनर्स पर लागू ईपीआर के संबंध में जानकारी दी। पर्यावरण संचालक ने आभार प्रकट किया।

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