राज्य में 22 हजार करोड़ का बिजली बिल बकाया 

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मुंबई- उर्जा मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के मुताबिक पहली बार हुआ जब राज्य में जीतनी बिजली की मांग है, उतनी आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब भी 22 हजार करोड़ रूपए बिजली बिल बकाया है। लोग बिल भर देंगे तो प्रस्तावित बिजली परियोजनाओं के लिए कर्ज नहीं लेना पड़ेगा। लोगों के बकाए बिल से मिलने वाली राशि से ही परियोजना का काम पूरा किया जा सकेगा।
प्रदेश में 2 लाख 24 हजार कृषि पंप ग्राहकों को योजना के माध्यम से बिजली कनेक्शन दिया जाएगा। किसानों के लिए उर्जा विभाग द्वारा 23 हजार 100 मेगावाट बिजली का उत्पादन व वितरण किया जा रहा है। विदर्भ और मराठवाड़ा विभाग में कृषि पंप को बिजली से जोड़ने की योजना के अंतर्गत 2018-19 व 2019-20 के बजट में प्रावधान किया जाएगा। उच्चदाब प्रणाली के पंप के प्रयोग से बिजली की खपत में कमी आने के अलावा चोरी कम होगी।
उर्जा मंत्री ने कहा कि राज्य में बिजली कटौती के आरोपों में कोई दम नहीं है। मात्र किसानों को खेती के लिए 8 घंटे की बिजली दी जा रही है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि भूजल स्तर कम न हो जाए। बावनकुले ने बिजली उपभोक्ताओं से अनुरोध किया है कि वे बिजली के बकाया बिल भर दें। बावनकुले ने कहा कि राज्य मंत्रीमंडल की बैठक में कृषि पंपों को उच्चदाब वितरण प्रणाली योजना के माध्यम से बिजली कनेक्शन देने का अहम निर्णय लिया गया है। प्रदेश में 2 लाख 24 हजार कृषि पंप ग्राहकों को योजना के माध्यम से बिजली कनेक्शन दिया जाएगा। किसानों के लिए उर्जा विभाग द्वारा 23 हजार 100 मेगावाट बिजली का उत्पादन व वितरण किया जा रहा है। विदर्भ और मराठवाड़ा विभाग में कृषि पंप को बिजली से जोड़ने की योजना के अंतर्गत 2018-19 व 2019-20 के बजट में प्रावधान किया जाएगा। उच्चदाब प्रणाली के पंप के प्रयोग से बिजली की खपत में कमी आने के अलावा चोरी कम होगी। इस योजना पर 4,496.69 करोड़ रुपए और नए उपकेन्द्र पर 551.44 करोड़ रुपए का खर्च अनुमानित है। कैबिनेट में कुल मिलाकर 5,048.13 करोड़ रुपए खर्च करने पर मुहर लगाई गई है।
उर्जा मंत्री ने बताया कि पिछले तीन साल में 4 लाख कृषि पंपों को बिजली कनेक्शन दिए गए हैं। महावितरण द्वारा प्रति कनेक्शन 1.5 लाख रुपए खर्च किए गए हैं। एचवीडीएस योजना के अंतर्गत प्रति कृषि पंप पर 2 लाख खर्च अपेक्षित है। लघुदाब प्रणाली के मुकाबले उच्चदाब वितरण प्रणाली के फायदे बहुत ज्यादा हैं। योजना को सफल बनाने के लिए महावितरण मुख्यालय में एक स्वतंत्र कक्ष स्थापित किया जाएगा। एचवीडीएस योजना लागू होने के बाद लघुदाब व उच्चदाब वितरण प्रणाली भी जारी रहेगी।
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