फिल्म अभिनेत्री मीनाक्षी के हत्यारों को उम्र कैद की सज़ा दी अदालत ने

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मुंबई- नेपाली मूल की फिल्म अभिनेत्री मीनाक्षी थापा हत्या प्रकरण में मुंबई सत्र न्यायालय ने दोनों दोषियों अमित जयस्वाल और प्रीति सुरीन को उम्र कैद की सजा सुनाई है। जयस्वाल और प्रीति ने वर्ष 2012 में मीनाक्षी की निर्मम हत्या कर दी थी। वे पकड़े न जा सके इसलिए उन्होंने मीनाक्षी के शव के दो टुकड़े कर अलग-अलग स्थानों पर फेंक दिया था। सरकारी वकील उज्जवल निकम ने दोनों दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग अदालत से की थी।
न्यायाधीश एस. जी. शेट्ये ने शुक्रवार को अपहरण, हफ्ता उगाही और हत्या के आरोप में दोषियों को उम्र कैद की सजा सुनाई। वर्ष 2012 में बॉलीवुड में बतौर जूनियर आर्टिस्ट के रूप में काम करनेवाली मीनाक्षी की फिरौती के लिए अपहरण कर लिया गया था। रुपए न मिलने से नाराज आऱोपियों ने उसकी हत्या कर दी थी।
मीनाक्षी नेपाल की रहनेवाली थी। मीनाक्षी की हत्या के आरोप में अमित जयस्वाल और प्रीती सुरीन को मुंबई सत्र न्यायालय ने आयपीसी धारा 302, 361(अ), 120(बी), 201 और आईटी एक्ट के अंतर्गत दोषी ठहराया था। न्यायाधीश एस. जी. शेट्ये ने शुक्रवार को अपहरण, हफ्ता उगाही और हत्या के आरोप में दोषियों को उम्र कैद की सजा सुनाई। वर्ष 2012 में बॉलीवुड में बतौर जूनियर आर्टिस्ट के रूप में काम करनेवाली मीनाक्षी की फिरौती के लिए अपहरण कर लिया गया था। रुपए न मिलने से नाराज आऱोपियों ने उसकी हत्या कर दी थी। उसके बाद मीनाक्षी की लाश को इलाहाबाद में फेंक दिया था। सबूत मिटाने के लिए आरोपियों ने सिर और धड़ को अलग-अलग जगहों पर फेंक दिया था।
दोनों आरोपी भोजपुरी फिल्म में काम दिलाने के बहाने से मीनाक्षी को पहले गोरखपुर ले गए और वहां बंधक बना कर रखा। वहां से दोनों ने मीनाक्षी की मां को 15 लाख रुपए फिरौती देने के लिए फोन किया। लेकिन मीनाक्षी की मां केवल 60 हजार रुपए ही दे पाई। इससे नाराज आऱोपियों ने निर्दयता से मीनाक्षी की हत्या कर दी। पुलिस की जांच में पाया गया कि प्रीति सरीन और अमित जायस्वाल ने ही मीनाक्षी की हत्या की है। इन दोनों की पहचान मीनाक्षी से फिल्म दिग्दर्शक मधुर भंडारकर की फिल्म हिरोईन की शूटिंग के दौरान हुई थी। बीते गुरुवार को इस मामले में सत्र न्यायालय में दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं थी। सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने दोनों आऱोपियों को फांशी की सजा देने की मांग अदालत से की थी। सरकारी पक्ष की ओर से इस केस को रेयर ऑफ दि रेयर सिद्ध करने की कोशिश की गई। इसके लिए सरकारी वकील ने 16 मुद्दों का आधार बनाया था।
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