फ़िल्म शूटिंग भी ‘लोक सेवा गारंटी कानून’ के दायरे में !

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एक खिड़की योजना सिर्फ़ मुंबई और उपनगरों के लिए
 
मुंबई- फिल्म, टीवी सीरियल, विज्ञापन और सूचना इत्यादि की शूटिंग के लिए जरूरी सरकार की विभिन्न अनुमतियां अब एक खिड़की योजना के माध्यम से देने का निर्णय मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया। वर्तमान में यह योजना केवल मुंबई और मुंबई उपनगर तक लागू की जाएगी। भविष्य में इसका विस्तार राज्य के अन्य हिस्सों में किया जाएगा।
लोक सेवा गारंटी कानून: भारत में लोक सेवा गारंटी कानून के अधिकार को वैधानिक कानून में शामिल किया हैं जो सरकार द्वारा नागरिकों को प्रदान की जाने वाली विभिन्न सार्वजनिक सेवाओं के लिए समयबद्ध वितरण की गारंटी देता है और अनुशासनहीन सरकारी नौकर को दंडित करने के लिए तंत्र प्रदान करता है. लोक सेवा गारंटी अधिनियम २०१० में मध्य प्रदेश राज्य द्वारा सबसे पहले लागू किया गया था । इसके अनुसार लोक सेवकों को तय समयसीमा में काम को पूरा करना होगा और ऐसा न होने पर जवाबदेही तय कर उन पर 500 से 5000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। नागरिकों को विद्युत, जल के कनेक्शन, बच्चों को स्कूल में प्रवश, जन्म, मृत्यु, निवास और विवाह के प्रमाण पत्र बनवाने के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। एफ.आई.आर. की कापी के लिए विनय नहीं करना होगा। बिहार 25 जुलाई 2011 को इस बिल को अधिनियमित करने के लिए दूसरा था। वर्तमान में यह अधिनियम बिहार, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, केरल, उत्तराखंड, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, झारखंड महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे कई अन्य राज्यों ने भी नागरिकों की सेवा के अधिकार के लिए समान कानून पेश किए हैं। 
प्रदेश में हिंदी, मराठी सहित अन्य भाषाओं की फिल्में, सारियल, विज्ञापन और सूचनाओं का बड़े पैमाने पर निर्माण किया जाता है। इसके लिए आवश्यक अनुमतियों की शीघ्र देने और व्यवसाय की सुलभता के लिए (Ease of doing business) एक छत्र योजना के माध्यम से फिल्मांकन की अनुमतियां देने का फैसला लिया गया है। निर्माताओं को सरकारी स्थलों पर शूटिंग करने की अनुमति देने की जानकारी 15 दिन के भीतर दे दी जाएगी। योजना पर अमल के लिए मुंबई के दादासाहेब फालके फिल्मसिटी के महाराष्ट्र चित्रपट, रंगभूमि एवं सांस्कृतिक विकास महामंडल को सनियंत्रक नियुक्त किया गया है। इस योजना को सेवा गारंटी कानून के दायरे लाने का फैसला किया गया है। राज्य सरकार के 14 वें विभाग के तहत आनेवाले स्थलों को इसमें शामिल किया गया है।
निर्माताओं को एक खिड़की योजना के माध्यम से ऑनलाईन प्रणाली से सभी नियम-शर्त को पूरा करना होगा। शुल्क भरने के बाद शूटिंग की अनुमति प्रक्रिया पूरी होगी। उसके बाद सनियंत्रक संस्था संबंधित सरकारी मशीनरी से अनुमति लेगी। यदि संबंधित मशीनरी ने कार्यालयीन कामकाज के सात दिन में कोई प्रतिसाद नहीं दिया तो शूटिंग के लिए कोई आपत्ति न होना मानकर अनुमति दे दी जाएगी। इसमें किसी अन्य संस्था की एनओसी अथवा अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी।
सनियंत्रक संस्था सभी विभागों से समन्वय स्थापित करके अंतिम अनुमति देगी। एक बार अनुमति मिल गई तो उस स्थल का आरक्षण रद्द नहीं किया जाएगा और न ही शुल्क वापस किया जाएगा। हालांकि अनुमति मिलने से पहले आवेदन रद्द करने पर प्रक्रिया शुल्क काटकर शेष राशि वापस दे दी जाएगी। इसके लिए www.maharashtrafilmcell.com वेबपोर्टल तैयार किया गया है।
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