पुराने नियम पर मिलेगा मछुआरों को शिकार का ठेका 

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मुंबई- राज्य सरकार ने प्रदेशभर के तालाबों में मछली मारने की संशोधित टेंडर प्रक्रिया को रद्द कर दिया है। जब तक नया सरकारी फैसला नहीं हो जाता, तब तक स्थानीय मछलीमार संस्थाओं को फुराने नियम के आधार पर मछली कारोबार का ठेका दिया जाएगा। यह जानकारी गुरुवार को  सामाजिक न्याय मंत्री राजकुमार बडोले ने मंत्रालय में दी।
बडोले ने बताया कि इस आशय का निर्णय कृषि, पशुसंवर्धन, दुग्ध व्यवसाय विकास एवं मत्स व्यवसाय विभाग ने लिया है। राज्य में 200 हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्रवाले तालाबों को स्थानीय मछलीमार को-आपरेटिव संस्थाओं को देने का निर्णय 26 जून 2014 को लिया गया था। इसके बाद 30 जून 2017 को संशोधित फैसला लिया गया। संशोधित फैसले को रद्द कर दिया गया है। जब तक नया निर्णय जारी नहीं हो जाता, तब तक 26 जून 2014 को लिया गया पुराना सरकारी निर्णय कायम रहेगा। मछुआरों की संगठनों की मांग पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस समस्या हल निकालने का लिखित निर्देश संबंधित विभागों को दिया था। संशोधित निर्णय रद्द होने से न केवल विदर्भ बल्कि पूरे महाराष्ट्र के तालाबों में मछली मारने का कारोबार करनेवाले मछुआरों को राहत मिली है।
पत्रकारों से बातचीत में बड़ोले ने बताया कि 30 जून 2017 को मछली मारने का ठेका देने का संशोधित सरकारी निर्णय लिया गया था। इस निर्णय से विदर्भ के मालगुजारी तालाबों में मछली मारनेवाले मछुआरों के सामने भूखमरी की नौबत आ गई थी। मछुआरों से जुड़े संगठनों ने मंत्री महादेव जानकर और गोंदिया जिले का पालकमंत्री होने के नाते उनसे गुहार लगाई थी। मछुआरों के साथ किए गए वादे के अनुसार मुख्यमंत्री के निर्देश पर मसले का हल निकल गया है। बड़ोले ने मुख्यमंत्री का आभार मानते हुए कहा कि संशोधित फैसले के तहत 200 हेक्टेयर अधिक क्षेत्रवाले तालाबों में मछली मारने का टेंडर लेने के लिए प्रति हेक्टेयर 1800 रूपए भरने पड़ते थे। इस फैसले के रद्द होने से अब पुराने निर्णयानुसार केवल 300 रूपए प्रति हेक्टेयर भरने होंगे। मछली मारनेवाली को-आपरेटिव संस्थाएं यह टेंडर राशि आसानी से भर सकती हैं।
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