सातवें वेतन से कर्मचारियों को लुभाएगी सरकार- एनसीपी 

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मुंबई – एनसीपी ने मुंख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के उस बयान की खिल्ली उड़ाई है, जिसमें उन्होंने जनवरी महीने से सरकारी कर्मचारियों  को सातवां वेतन आयोग की राशि दिए जाने की घोषणा की है। एनसीपी का आरोप है लोकसभा और विधानसभा का चुनाव एक साथ कराए जाने की तैयारियों को लेकर यह घोषणा की गई है। असल में केवल पांच से सात फीसदी राशि देने की शुरूआत करके चुनाव में कर्मचारियों को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश की जाएगी।

जनवरी महीने से सातवें वेतन का पैसा देने की शुरूआत महज़ एक चुनावी वादा- पाटिल 

एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व वित्त मंत्री जयंत पाटिल के अनुसार सरकार को पहले धनराशि का अंतर पूरा करना है, साथ ही मूल राशि हजार करोड़ रुपए देने हैं। यैसे में मुख्यमंत्री ने जो कमिटमेंट राज्य के सरकारी कर्मचारियों को दिया है, इससे लगता है सरकार कर्मचारियों के मुंह पर पानी पोंछने का काम करेगी।  पाटिल ने आरोप लगाया कि सातवां वेतन आयोग घोषित होने के बाद राज्य सरकार ने उसे लागू करने में विलंब किया। । अब चुनाव करीब आता देख सातवां वेतन आयोग की राशि देने की घोषणा की है। असलियत में कर्मचारियों को पूरी रकम नहीं दी जाएगा।  लेकिन थोड़ा सा हिस्सा देकर सरकार सहानुभूति बटोरने की कोशिश करेगी। इसी तरह की घोषणा मुख्यमंत्री ने की है।

पाटिल के अनुसार मुख्यमंत्री ने जनवरी महीने से सातवें वेतन का पैसा देने की शुरूआत करने की घोषणा की है । इसका अर्थ है कर्मचारियों को पैसे देने की इच्छा सरकार की नहीं है। अप्रैल-मई महीने में चुनाव होने के अनुमान है । सातवां वेतन देने का चुनावी मुद्दा बनाया जाएगा। असल में कर्मचारियों को पांच से सात फीसदी राशि देने की शुरूआत की जाएगी। पाटिल के मुताबिक राज्य के सभी सरकारी और अर्ध सरकारी कर्मचारी सरकार से नाराज हैं। सरकारियों को महंगाई भत्ता देने में भी सरकार आनाकानी करती है । मंहगाई भत्ता लेने के लिए कर्मचारियों को संघर्ष करना पड़ता है। पाटिल ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार कर्मचारियों को दुर्लक्षित कर रही है। अब नया फतवा जारी किया गया है कि नई योजना लेनी है तो 25 प्रतिशत कर्मचारी कम करके नई योजना का प्रस्ताव पेश किया जाए। अर्थात सरकार को महाराष्ट्र में ठेकेदारी पद्धति लागू करनी हैं।

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