गुंडे सक्रिय – पुलिस निष्क्रिय : मुंबई में लोगों का जीना हराम

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मुंबई में चेन खीचने और मोबाइल छिनने की घटनाएँ बढ़ती ही जा रही हैं, अब अपराधियों की हिम्मत भी बढ़ती जा रही है। वो अब अपने शिकारों पर हमले भी करने लगे हैं।

 

कुछ ही दिनों पहले एक चेन स्नैचर ने कुर्ला स्टेशन पर एक लड़की का मोबाईल फोन छीनने के चक्कर में लोकल के आगे धकेल दिया जिसके कारण लड़की की ट्रेन के नीचे आने से मौके पर ही मौत हो गई।

 

एक युवा वकील रात में ऑटो रिक्शा से लौट रहा था, दो लोग उसके ऑटो में जबरन घुस आए। ये गुंडे उसका बटुआ और मोबाइल माँगने लगे। जब वकील ने उनकी मांग पूरी नहीं की और वहां से भागने की कोशिश की तो उन बदमाशों ने उसके सिर पर लोहे की छड़ से वार करके बेहोश कर दिया।

 

हमारे कैमरामैन राकेश के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ। पुलिस सिर्फ सड़कों पर प्रचार करती घूम रही है, ऐक्शन लेती दिख ही नहीं रही है। पुलिसकर्मी रात में गश्त पर दिखते ही नहीं हैं। छोटे अपराधों के कारण लोगों का जीना हराम हो गया है।

 

मनसे और शिवसेना यूं तो उत्तर भारतियों के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरे ही दिखते हैं मगर इस मामले में उनके “शक्तिशाली” कार्यकर्ता भी कोई ऐक्शन लेते नहीं दिखते हैं। वे समाज की रक्षा करने का दम भरते हैं लेकिन कहीं उनकी उपस्थिति ऐसे मामलों में क्यों नहीं दिखती है।

 

हालात ऐसे हो चले हैं कि मुंबई में भी आम आदमी घर से बाहर निकलने में डरने लगा है। मुंबई जहाँ रात-रात भर लड़के-लड़कियाँ मस्ती करते सुरक्षित विचरण करते थे, अब हालात बिहार की मानिंद हो चले हैं। बिहार पर आरोप लगाना आसान है क्योंकि वहां जंगल राज था कभी, अब वह मुंबई में भी दिखने लगा है।

 

इन दिनों शाम होते ही लोग अपने घरों में सिमटते दिखने लगे हैं। सही भी है, पुलिस पर भरोसा नहीं होने के चलते अपनी सुरक्षा खुद ही करनी पड़ेगी। भले ही यह तरीका क्यों न अपनाना पड़े।

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