राज्यपाल ने दी नेत्र विशेषज्ञों को नए शोध की चुनौती  

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मुंबई- राज्यपाल सी. विद्यासागर राव ने नेत्र विशेषज्ञों को अंधत्व निवारण की चुनौती स्वीकार करने की नसीहत दी है। उन्होंने कहा है समाज के आर्थिक, सामाजिक दृष्टि से वंचित तबकों के नेत्र उपचार के लिए नेत्र चिकित्सकों को सर्वोत्तम, सस्ते और अत्याधुनिक तकनीकी का संशोधन करना होगा। इसके लिए देश से अंधत्व दूर करने की चुनौती नेत्र विशेषज्ञों को स्वीकार करनी होगी।
मोतियाबिंद से आनेवाले अंधत्व का प्रमाण सर्वाधिक 62 प्रतिशत है। राज्यपाल के मुताबिक नेत्र चिकित्सा और ऑपरेशन के क्षेत्र में नई तकनीकी को स्वीकार किया जाए। राज्यपाल ने कहा कि कई अस्पताल मरीजों से भरे हुए होते हैं। ऐसे अस्पतालों के सबलीकरण के लिए सार्वजानिक निजी भागीदारी की आवश्यकता है।
बारहवें अंतर्राष्ट्रीय ‘एडवान्सेस इन ऑपथॅल्मोलॉजी’ कांग्रेस और इंटरनेशनल अकादमी फॉर एडवान्सेस इन ऑपथॅल्मोलॉजी के चौबीसवें स्थापना दिवस के  उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम को राज्यपाल संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने कहा कि दुनिया में सबसे ज्यादा अंधत्व की समस्या भारत में है। मेडिकल सुविधा न पहुंच पाने के कारण लगभग 70 फीसदी नेत्रहीन व्यक्तियों का अंधत्व दूर नहीं हो पा रहा है। ओरबिस संस्था के अनुमान के अनुसार 2020 तक भारत में नेत्रहीनों की संख्या 15 दशलाख तक पहुंच सकती है। मोतियाबिंद से आनेवाले अंधत्व का प्रमाण सर्वाधिक 62 प्रतिशत है। राज्यपाल के मुताबिक नेत्र चिकित्सा और ऑपरेशन के क्षेत्र में नई तकनीकी को स्वीकार किया जाए। राज्यपाल ने कहा कि कई अस्पताल मरीजों से भरे हुए होते हैं। ऐसे अस्पतालों के सबलीकरण के लिए सार्वजानिक निजी भागीदारी की आवश्यकता है। सभी जिला अस्पतालों का आधुनिकीकरण करने के साथ ही नेत्र चिकित्सा के लिए सर्वोत्तम बुनियादी सुविधाओं का प्रबंध करना जरुरी है। मोतियाबिंद के ऑपरेशन की तरह अन्य उपचार के लिए लोगों को बड़े शहरों में न जाना पड़े।
राज्यपाल के अनुसार भारत में शुगर की एक गंभीर समस्या सामने है। तकरीबन 60 प्रतिशत भारतीय डायबेटिस, हाई ब्लडप्रेशर की चपेट में हैं।         नेत्रदान की संख्या बढ़ाने की जरूरत है। प्रतिवर्ष आयोजित होनेवाली आई एडवान्स परिषद में विचारमंथन के कारण नेत्र विज्ञान में प्रगति की चर्चा होगी। इसका लाभ आम जनता तक पहुंचाने के लिए प्रयास करने अनुरोध राज्यपाल ने किया है।
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