Hawking Is Dead???

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नहीं रहे स्टीफेन हॉकिंग?

मुंबई: प्रसिद्ध वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का निधन हो चुका है, और इतना ही नहीं, उनकी जगह एक बहुरूपिये ने ले ली है जो एकदम प्रोफेसर के जैसा दिखता है। एक ऑनलाइन पोर्टल ने दावा किया कि ये बहुरूपिया साजिश कर्ताओं के हाथों की एक ‘कठपुतली’ है.

अन्वेशकों का मानना ​​है कि हॉकिंग का 1985 में ही निधन हो गया था मगर राजनीतिक और वैज्ञानिक कारणों से इस बात को दबा दिया गया और एक बहुरूपिये को उनके स्थान पर बैठा दिया गया।

1963 में जब हॉकिंग सिर्फ 21 साल के थे, तो उन्हें बीमारी एएलएस का पता चला था। ए एल एस अमाइट्रोफिक पार्श्व कैंसर है जो एक दुर्लभ तंत्रिका संबंधी रोग है जो मुख्य रूप से तंत्रिका कोशिकाओं को प्रभावित करता है। उस समय हॉकिंग को जीने के लिए 2 साल दिए गए थे. श्री हॉकिंग अब 76 हैं। बहुत से लोगों का मानना हैं कि प्रोफेसर के लम्बे जीवन का कारण अस्तित्व चिकित्सा विज्ञान, प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक संचार हैं। अन्वेशकों का मानना ​​है कि हॉकिंग का 1985 में ही निधन हो गया था मगर राजनीतिक और वैज्ञानिक कारणों से इस बात को दबा दिया गया और एक बहुरूपिये को उनके स्थान पर बैठा दिया गया। अन्वेशक हॉकिंग के वर्तमान और पहले के चहरे की तुलना कर रहे हैं। अन्वेशकों का कहना है कि हॉकिंग अब छोटे दिखते हैं और उसका कान का आकार घट गया।

अब सवाल यह है, इस साजिश के पीछे क्या कारण है? ग्लोबल वार्मिंग, एल नीनो से ले कर किसी भी प्रकार की भौतिक विज्ञान संम्बन्धि सिद्धांतों पर स्टीफन हॉकिंग की गहरी पकड़ है और उनकी बात पूरी दुनिया मानती है. दुनिया में हॉकिंग के बहुत से प्रशंसक है। अन्वेशकों का दावा है कि “कठपुतली हॉकिंग” अब दुनिया में हेरफेर करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। हालाँकि इस सिद्धांत की कोई पुष्टि या प्रमाण नहीं है।

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