पुणे एलईडी बल्ब घोटाले  की होगी उच्चस्तरीय जांच

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मुंबई- पुणे शहर में एलईडी परियोजना गलत तरीके से कार्यान्वित की गई है या काम में अनियमितता बरती गई है तो  मुख्य सचिव के मार्फत इसकी उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी। यह घोषणा नगर विकास राज्यमंत्री डॉ. रणजीत पाटिल ने मंगलवार को नागपुर विधान परिषद में की। 

पुणे शहर की सड़कों पर विद्युत बल्ब बदलकर आधुनिक पद्धति के एलईडी बल्ब लगाने के लिए,  महानगरपालिका ने 90 करोड़ रुपए की निविदा वर्ष 2016 में जारी की थी।

पुणे की एलईडी परियोजना के संबंध में ध्यानाकर्षण सूचना सदस्य अनिल भोसले ने पेश की थी।  इसके जवाब में  डॉ. पाटिल ने कहा कि पुणे शहर की सड़कों पर विद्युत बल्ब बदलकर आधुनिक पद्धति के एलईडी बल्ब लगाने के लिए,  महानगरपालिका ने 90 करोड़ रुपए की निविदा वर्ष 2016 में जारी की थी। निविदा प्रक्रिया में टाटा प्रोजेक्टस प्राइवेट लि. की निविदा पात्र हुई थी। उसके तहत 77 हजार एलईडी स्ट्रीटलाइट सेन्ट्रलाईज कंट्रोल एण्ड मॉनिटरिंग सिस्टम (स्काडा) लगाया जाना था। समझौते की शर्तो के अनुसार बकाया भुगतान करने के लिए नेशनल बैंक में स्वतंत्र खाता खोलना जरूरी था। इस संबंध में पूछताछ की गई है। 

राज्यमंत्री ने कहा कि इस संदर्भ में कंपनी की ओर से बिठाए गए फिटिंग व स्काडा फिडर की सुनिश्चितता करने के बाद ही बकाए का भुगतान किया गया है। फिडर बिठाने और काम में अनियमितता पाए जाने पर मामले की गहराई से जांच चल रही है। इस प्रकरण में किसी को भी संरक्षण नहीं दिया जाएगा।  इस मामले के संबंधित लेखाधिकारी की भी जांच होगी. यदि वे दोषी पाए जाते हैं तो उन्हे पद से हटाया जाएगा। उनका हस्ताक्षरवाला अधिकार भी हटा लिया जाएगा। समयसीमा के अंदर के मामले की जांच पूरी की जाएगी। 

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