छोटा राजन सहित 9 को आजीवन कारावास की सजा 

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जे डे हत्याकांड: पत्रकार जिग्ना वोराऔर जोसेफ पॉलसन बरी 

मुंबई : पत्रकार ज्योर्तिमय डे हत्याकांड में अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन सहित सभी 9 दोषियों को मुंबई की मकोका कोर्ट की विशेष अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। छोटा राजन, सतीश कालिया, अभिजीत शिंदे, अरुण डाके, सचिन गायकवाड, अनिल वाघमोडे, निलेश शेंडगे, मंगेश अग्रवाल और दीपक सिसोडीया इन नौ दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। इसके अलावा हत्या के दोषियों को 5 लाख से लेकर 20 लाख रुपए तक का जुर्माना भी लगाया गया है। इस मामले में पत्रकार जिग्ना वोराऔर जोसेफ पॉलसन को अदालत ने बरी कर दिया है।
पत्रकार जिग्‍ना वोरा और पॉलसन जोसेफ को बरी कर दिया गया है। मौजूदा समय में छोटा राजन नई दिल्ली के तिहाड़ सेंट्रल जेल में बंद है। छोटा राजन को नवंबर 2015 में इंडोनेशिया से यहां लाया गया था और मामले का एक आरोपी बनाया गया था। सबूतों और गवाहों के आधार पर जेडे की हत्या की साजिश रचने का छोटा राजन मुख्य आरोपी सिद्ध हुआ है। तिहाड़ जेल से छोटा राजन की वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए कोर्ट में पेशी हुई थी। 
अंग्रेजी मिड डे अखबार के पत्रकार जे डे की हत्या 11 जून 2011 को  की गई थी। महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) की विशेष अदालत ने इस मामले की अंतिम सुनवाई फरवरी में शुरू की थी। मामले की सुनवाई बीते अप्रैल महीने में समाप्त हुई। तकरीबन सात साल बाद मकोका कोर्ट का फैसला आया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर अडकर की अदालत ने बुधवार को कुल 11 आरोपियों में से  9 को दोषी करार दिया। पत्रकार जिग्‍ना वोरा और पॉलसन जोसेफ को बरी कर दिया गया है। मौजूदा समय में छोटा राजन नई दिल्ली के तिहाड़ सेंट्रल जेल में बंद है। छोटा राजन को नवंबर 2015 में इंडोनेशिया से यहां लाया गया था और मामले का एक आरोपी बनाया गया था। सबूतों और गवाहों के आधार पर जेडे की हत्या की साजिश रचने का छोटा राजन मुख्य आरोपी सिद्ध हुआ है। तिहाड़ जेल से छोटा राजन की वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए कोर्ट में पेशी हुई थी।
आरोपी विनोद आसरानी उर्फ विनोद चेंबुर की एक निजी अस्पताल में अप्रैल 2015 में मौत हो गई थी। विनोद सह साजिशकर्ता था। विनोद ने ही हत्या के लिए धन का प्रबंध किया था। इस केस में नयन सिंह बिष्ट नामक आरोपी अभी भी फरार है। शेष 11 में से जोसेफ पॉलसन और जिग्ना वोरा को केस से बरी किया गया है। सिद्ध हुआ है कि जेडे की छोटा राजन गैंग के लोगों ने ही हत्या की थी। छोटा राजन, सतीश कालिया, अभिजीत शिंदे, अरूण डाके, सचिन गायकवाड, अनिल वाघमोडे, निलेश शेंडगे, मंगेश अग्रवाल और दीपक सिसोडिया को सजा सुनाई गई है
 मुंबई स्थित पवई इलाके के हीरानंदानी परिसर में जेडे की उनके घर के करीब दिन दहाड़े हत्या कर दी गई थी।  शुरूआत में जेडे हत्याकांड में 13 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए गए थे। इसमें से एक आरोपी की मृत्यू हो गई तो दूसरा फरार है। आरोपी विनोद आसरानी उर्फ विनोद चेंबुर की एक निजी अस्पताल में अप्रैल 2015 में मौत हो गई थी। विनोद सह साजिशकर्ता था। विनोद ने ही हत्या के लिए धन का प्रबंध किया था। इस केस में नयन सिंह बिष्ट नामक आरोपी अभी भी फरार है। शेष 11 में से जोसेफ पॉलसन और जिग्ना वोरा को केस से बरी किया गया है। सिद्ध हुआ है कि जेडे की छोटा राजन गैंग के लोगों ने ही हत्या की थी। छोटा राजन, सतीश कालिया, अभिजीत शिंदे, अरूण डाके, सचिन गायकवाड, अनिल वाघमोडे, निलेश शेंडगे, मंगेश अग्रवाल और दीपक सिसोडिया को सजा सुनाई गई है। केस का प्रमुख आरोपी सतीश कालिया है, जिसने छोटा राजन के कहने पर इस हत्या की साजिश रची। उसने छोटा राजन से बात की। जे डे पर उसी ने गोलियां चलाईं। उसी ने हत्या के लिए अन्य आरोपी जमा किए। सतीश कालिया ही अनिल वाघमोरे, नीलेश शेडगे, अभिजीत शिंदे को लेकर नैनीताल गया।
विशेष मकोका अदालत ने जून 2015 में वोरा समेत बाकी 10 आरोपियों के विरुद्ध आरोप तय किए थे। छोटा राजन की गिरफ्तारी के बाद, केंद्रीय जांच ब्यूरो(सीबीआई) ने जेडे हत्याकांड की दोबारा जांच में छोटा राजन को आरोपी बनाया था। पहले यह जांच पुलिस कर रही थी, बाद में मामला जांच के लिए सीबीआई को सुपुर्द कर दिया गया। क्राइम ब्रांच ने भी मामले की जांच की। इस हत्या के लिए हत्यारों को पांच लाख रुपए की सुपारी दी गई थी। जिसमें दो लाख रुपए एडवांस में दिए गए थे। विशेष सरकारी वकील प्रदीप घरात के  मुताबिक तीन आरोपियों ने अपनी संलिप्तता को लेकर अदालत में आपने बयान दर्ज करा दिए थे। मामले की सुनवाई के दौरान कुल 155 गवाहों की गवाही दर्ज की गई।
जे डे ‘खल्लास- एन ए टू जेड गाईड टू द अंडरवर्ल्ड’ और ‘जीरो डायल : द डेंजरस वर्ल्ड ऑफ इनफोरमर्स’ के लेखक थे। वे मौत से पहले अपनी तीसरी किताब ‘चिंदी : राग्स टू रिचेस’ लिख रहे थे। जेडे ने अपनी किताब में माफिया डॉन राजन की चिंदी (तुच्छ) के रूप उल्लेख किया था। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि छोटा राजन गुस्से में थे। छोटा राजन के संवाद में पत्रकार जिग्ना वोरा के नाम का जिक्र था। सीडीआर के सबूतों के तहत जिगन्ना वोरा छोटा राजन के संपर्क में थी।
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