#Jashn-E-Wiladat: Raja Mushtaq Performs

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अहाता-ए-नूर में क़व्वाली पेश कर राजा मुश्ताक़ ने इतिहास रचा!

अजमेर, 25 फ़रवरी 2018. ख्वाजा ग़रीब नवाज़ के जन्म दिन पर आयोजित जश्न-ए-विलादत के ख़ास मौक़े पर मुंबई से आए सिंगर राजा मुश्ताक़ ने अजमेर शरीफ़ दरगाह के अहाता-ए-नूर में गद्दीनशी क़व्वालों के साथ क़व्वाली प्रस्तुत कर एक नया इतिहास रचा. राजा जश्न-ए-विलादत के आयोजक जनाब सैयद हिमायत हुसैन के व्यक्तिगत निमंत्रण पर अजमेर पहुँचे थे.

राजा मुश्ताक़ ने अमीर खुसरो साहेब का कलाम “मन कुंतो अली मौला” पेश किया. उनके गायन को उपस्थित हाज़रीनों और ख्वाजा साहेब के चाहने वालों की अपार भीड़ ने बहुत सराहा.

हिमायत हुसैन साहेब ने बताया की जश्न-ए-विलादत उनके वालिद महरूम जनाब तक़द्दुस हुसैन साहेब ने 70 साल पहले शूरू किया था. इन सत्तर सालों में आहता-ए-नूर में सिर्फ़ दरगाह के गद्दीनशी क़व्वाल की कलाम पेश करते आए हैं. ये 70 साल में पहली बार हुआ है की किसी आमंत्रित गायक ने जश्न-ए-विलादत पर आहता-ए-नूर में क़व्वाली पेश की हो.

 

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क़व्वाली के बाद 6डी न्यूज़ से बात करते हुए राजा मुश्ताक़ ख़ुशी से फूले नहीं समा रहे थे. उन्होंने कहा कि उनके पास शब्द नहीं हैं ये बयान करने के लिए कि उन्हें कैसा महसूस हो रहा है. राजा ने कहा कि मैं उस छोटे से बच्चे की तरह महसूस कर रहा हूँ जो क्लास में फ़र्स्ट आ गया है और चीख़ चीख़ कर उछल उछाल कर पूरा मोहल्ला सिर पर उठा लेना चाहता हो. “मेरी वर्षों से तम्मन्ना थी की मैं ख्वाजा साहब के दरबार में अपना कलाम पेश कर सकूँ. मुझे नहीं मालूम था कि मेरी ये ख़्वाहिश ख्वाजा साहेब के जन्म दिन के मुबारक मौक़े पर पूरी होगी और मैं आहता-ए-नूर में बैठ कर क़व्वाली गाऊँगा. राजा ने भिवंडी से आए जनाब सखावत अली साहब और इवेंट के आयोजक साहबज़ादा सैयद हिमायत हुसैन साहेब को बहुत बहुत शुक्रिया अदा किया ये कहते हुए कि उन्होंने इस नाचीज़ को इस क़ाबिल समझा और ये मौक़ा दिया. राजा ने अजमेर शरीफ़ के गद्दीनशी क़व्वाल अमजद मियाँ और उनके साथी कलाकारों का भी साथ देने के लिए शुक्रिया अदा किया.

जनाब हिमायत हुसैन साहब ने राजा की क़व्वाली की तारीफ़ करते हुए कहा की राजा ने जश्न-ए-विलादत की रौनक़ बढ़ा दी. हिमायत हुसैन साहेब ने बताया की जश्न-ए-विलादत उनके वालिद महरूम जनाब तक़द्दुस हुसैन साहेब ने 70 साल पहले शूरू किया था. इन सत्तर सालों में आहता-ए-नूर में सिर्फ़ दरगाह के गद्दीनशी क़व्वाल की कलाम पेश करते आए हैं. ये 70 साल में पहली बार हुआ है की किसी आमंत्रित गायक ने जश्न-ए-विलादत पर आहता-ए-नूर में क़व्वाली पेश की हो. उन्होंने कहा कि ये सब राजा पर ख्वाजा साहेब का करम है, हम सब तो माध्यम मात्रा हैं.

 

 

 

 

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