#KalpanaChawla: पहली भारतीय महिला अंतरिक्ष यात्री.

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मुंबई. भारतीय मूल की कल्पना चावला जब नासा के मिशन पर अंतरिक्ष में गयीं तो उन्होंने इतिहास तो रचा ही, हिंदुस्तान भर की लड़कियों के लिए वो मिसाल बन गयीं थी. वो अंतरिक्ष में गयी तो मगर जीवित न लौट सकीं. आज से ठीक 15 साल पहले, 1 फरवरी 2003 को भारत ने अपनी प्रसिद्ध बेटी को खो दिया था. 1 फरवरी 2003 के दिन जब कल्पना अपने साथी सात करूँ मेम्बर्ज़ के साथ अंतरिक्ष यान में वापस धरती की तरफ़ आ रहीं थी तब पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते समय उनके अंतरिक्ष यान में घरशं के कारण आग लग गयी और वायुयान एक आग के गोले में तब्दील हो गया था. इस दुर्घटना में सभी यात्रियों की मौत हो गयी थी. कल्पना, दृढ़ इरादों वाली स्वतंत्र भारतीय महिलाओं के लिए एक साहसी उदाहरण हैं जो अपने सपनों को संजोना चाहती हैं और ज़िंदगी को अपनी शर्तों पर जीना चाहती हैं.

अपने जीवन के दूसरे मिशन पर कल्पना ने 16 जनवरी, 2003 को उड़ान भरी. 1 फरवरी 2003 को अंतरिक्ष मिशन का दुखद अंत एक दुर्घटना में हुआ जिसमें चालक दल के सभी सदस्यों की मौत हो गयी.

कल्पना का जन्म 1 जुलाई, 1961 को भारत में करनाल में हुआ. जब कल्पना बच्चा थी, वह हवाई जहाज के चित्र बनाया करती थीं. उन्होंने 1976 में टैगोर स्कूल करनाल से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। पंजाब विश्वविद्यालय से एरोनोटिकल साइंसेज में स्नातक किया तथा टेक्सास विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर किया. बाद में उन्होंने कोलोराडो विश्वविद्यालय से एयरोस्पेस पर डॉक्टरेट किया.

1988 से कल्पना ने नासा में काम करना शुरू किया. और कल्पना सबसे पहले 1 997 में अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरी। कल्पना चावला को दूसरे स्पेस मिशन के लिए छः अन्य सदस्यों के साथ चुना गया. अपने जीवन के दूसरे मिशन पर कल्पना ने 16 जनवरी, 2003 को उड़ान भरी. 1 फरवरी 2003 को अंतरिक्ष मिशन का दुखद अंत एक दुर्घटना में हुआ जिसमें चालक दल के सभी सदस्यों की मौत हो गयी. इस साल नासा ने कल्पना चावला सहित दुर्घटना में मारे गये सभी अंतरिक्ष महनायकों को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी.

भारत ने अपने पहले मेट-सेट उपग्रह श्रृंखला का नामकरण कल्पना के नाम पर रखा है और उनकी याद को समर्पित किया है. भारतीय और संयुक्तराष्ट्र में कल्पना के नाम पर कई छात्रवृत्तियां भी घोषित की गयीं हैं.

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