‘खेत तालाबों’ से महाराष्ट्र में बढ़ा सिंचाई क्षेत्र का दायरा  

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मुंबई- राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी खेत तालाब योजना से सिंचाई क्षेत्र का दायरा बढ़ गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उम्मीद जताई है कि इससे रबी मौसम में राज्य के किसान फसल की पैदावार बढ़ा सकेंगे। सबसे ज्यादा खेत तालाबों की संख्या विदर्भ के यवतमाल जिले में बढ़ी है। लगभग 6000 से अधिक खेत तालाबों का निर्माण करके यवतमाल जिले के किसानों ने अन्य जिलों के लिए मिसाल कायम की है।
दो वर्ष पहले राज्य सरकार ने ‘जो मांगे उसे खेत तालाब’योजना शुरू की थी। तब से लेकर अभी तक विदर्भ के जिलों के किसानों ने 6200 तालाब बनाए हैं। यवतमाल जिला कृषि प्रधान है। पिछले कुछ साल में कम पैदावार और अन्य कारणों से इस जिले में किसानों की आत्महत्या अधिक हो रही थी।
राज्य सरकार की ओर से जानकारी दी गई है खेत तालाबों के कारण करीब 6000 हेक्टेयर जमीन सिंचाई के दायरे में आ सकी है और उसका सीधा प्रभाव रबी मौसम में अच्छा उत्पादन लेने में होगा। खेत तालाबों के माध्यम से बारिश का पानी भविष्य के लिए भंडारण करके रखा जा सकता है। दो वर्ष पहले राज्य सरकार ने ‘जो मांगे उसे खेत तालाब’योजना शुरू की थी। तब से लेकर अभी तक विदर्भ के जिलों के किसानों ने 6200 तालाब बनाए हैं। यवतमाल जिला कृषि प्रधान है। पिछले कुछ साल में कम पैदावार और अन्य कारणों से इस जिले में किसानों की आत्महत्या अधिक हो रही थी। मुख्यमंत्री के मुताबिक पिछले कुछ वर्षो में इस जिले में बारिश का प्रमाण कम होने से शुष्क भूमि क्षेत्र में फसल उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। दो साल पहले राज्य सरकार ने मांगे उसे शेततळे यह योजना फरवरी 2016 में शुरू की थी। उन दिनों यवतमाल जिले को 4500 खेत तालाब बनाने का लक्ष्य दिया गया था। मुख्यमंत्री के अनुसार केवल 66 फीसदी बारिश से वर्ष 2017 के रबी और अन्य गर्मी के मौसम वाली फसलों का क्षेत्र तेजी से कम हो गया। फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए भूजल स्तर बढ़ाना बेहद जरूरी है। उसके लिए बारिश का पानी जमीन में रिसना चाहिए। राजस्व और कृषि विभाग के बेहतर समन्वय के कारण खेत तालाबों का निर्माण किया जा सका है।
फडणवीस ने कहा कि तहसील स्तर पर किसानों के साथ बैठक कर, अधिकारियों ने उन्हें योजना की संपूर्ण जानकारी दी और उन्हें उसका महत्व समझाया। पालकमंत्री मदन येरावार ने कहा कि इस योजना की राशि सीधे किसानों के बैंक खाते में जमा होने से, ठेकेदार काम करने पर राजी नहीं थे। इस परिस्थिती में यवतमाल जिला प्रशासन ने मध्यस्तता करके किसानों और मशीन मालिकों के बीच समझौता कराया और खेत तालाबों के काम शुरू हो सके। मशीन मालिकों को गारंटी दी गई कि बैंक खाते में पैसे जमा होने के बाद किसान उनके बिल का भुगतान करेगें। येरावार ने कहा कि मशीन का काम बढ़ गया था, जिसके कारण काम की लागत भी बढ़ रही थी। “इस अधिक खर्च को टालने के लिए किसानों को समूह में खेत तालाबों का काम कराने का सुझाव दिया गया।
यवतमाल के जिलाधिकारी राजेश देशमुख के मुताबिक योजना के लिए आए 10,518  ऑनलाइन आवेदनों में से 8,355 किसानों के आवेदन तकनीक तौर पर पात्र पाए गए। उनमें से 6200 खेत तालाबों के काम छह महीने की कालावधि में पूरे हुए। खेत तालाबों के काम से अब 6000 हेक्टेयर जमीन संरक्षित सिंचाई के दायरे में आ सकी है। रेशम खेती के लिए जिन किसानों ने तालाब खोदा है, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। रेशम की खेती करनेवालों को डीजल इंजन और बिजली से चलनेवाले पंप दिए जाएंगे।‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ के तहत किसानों को ड्रिप सिंचाई सुविधाएं मुहैया कराने की सूचना प्रशासन की ओर से दी गई है।
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