#lipstickundermyburkha : Review

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‘ लिपिस्टिक अंडर माई बुर्का ‘ एक बेहद खूबसूरत फिल्म।

Pritpal Kaur Chandi, 6D Consulting Editor

मुंबई, एक नज़र प्रडूसर प्रकाश झा की फिल्म  ‘ लिपिस्टिक अंडर माई बुर्का ‘ . बेहद खूबसूरत फिल्म। अलग अलग उम्र की लङकियों की संवेदनाओं, जिंदगी से उम्मीदों और यौन उपेक्षाओं को उजागर करती एक बोल्ड फिल्म।

बुर्के की आड़ में शापलिफ्टिंग करती लडकी सहानुभूति जगाती है दिल में। उसका आसमान छोटा है, वो अपनी मासूम कैंची से काट कर बडा करती है और जेल जा पहुंचती है। मां बाप के लिए शर्मिंदगी की बायस। फिर उषा जी हैं। पकी उम्र की विधवा। एक नौजवान स्विमिंग इन्स्ट्रक्टर से फोन पर सेक्स करती हैं और उसी नौजवान सहित सारे पडोसियों की लानत मलानत सहती हैं
एक शादीशुदा मुस्लिम महिला है जो हिम्मत नही कर पाती अपने नाकारा पति को ये बताने की कि एक उम्दा नौकरी कर रही है।
पति का इश्क कही और चल रहा है। पत्नी जब बात करने की कोशिश करती है तो उसे जबरन सेक्स करने पर मजबूर करता है। शादी में मौजूद oppression की बेहद मार्मिक तस्वीर । फिर एक nymphomaniac type का किरदार भी है जो यह तय नहीं कर पाती कि उसे जिंदगी में चाहिये क्या?
पूरी फिल्म के दौरान मेरे आस पास बैठे लोग, पुरूष और महिलाएं दोनों ही अधकचरे और क्रूर और काफी हद तक अश्लील रिमार्क्स करते रहे।
हमारे समाज की संवेदनशीलता को अभी बहुत लम्बा सफर तय करना है उस मुकाम तक पहुंचने में जहां non-judgemental हो कर किसी दूसरे के दर्द या तकलीफ को समझ सकें ।
कुल मिलाकर बेहद संगीन सवाल उठाती हुई फिल्म। लेकिन मुझे यह भी लगा कि हमारा समाज इतनी खुली और बोल्ड फिल्म के लायक संवेदनशील अभी नहीं हो पाया है। पूरी फिल्म के दौरान मेरे आस पास बैठे लोग, पुरूष और महिलाएं दोनों ही अधकचरे और क्रूर और काफी हद तक अश्लील रिमार्क्स करते रहे। जो फिल्म देखने में बाधक बने। हमारे समाज की संवेदनशीलता को अभी बहुत लम्बा सफर तय करना है उस मुकाम तक पहुंचने में जहां non-judgemental हो कर किसी दूसरे के दर्द या तकलीफ को समझ सकें ।
कुछ दृश्यों की शायद जरूरत नहीं थी । मगर ये वही दृश्य हैं जो बताते हैं कि कोई कोई मर्द किस तरह सेक्स को एक टूल की तरह इस्तेमाल करता है औरत को दबाए रखने में, उसे एक व्यूह चक्र में डाले रखने में ।

फिल्म सवालों तक ही रुक जाती तो प्रभावी रहती। ये ऐसे सवाल हैं जिन्हें अपने जवाब खुद हासिल करने हैं। फिल्म के अंत में जिस तरह सिगरेट के धुंए के जरिये इन पर विचार करने की अधकचरी कोशिश की गई है उसने फिल्म की गम्भीरता पर कई प्रश्न खडे कर दिये।
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