लिम्का बुक ऑफ रेकॉर्ड में महाराष्ट्र वन विभाग की “हैट्रिक”

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मुंबई- वन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार के नेतृत्व में वन विभाग ने लोगों की सहभागिता से बड़ा कारनाम कर दिखाया है।  वन विभाग के तीन कार्यक्रमों को लिम्का बुक ऑफ रेकॉर्ड में दर्ज किया गया है। 

2 करोड़ 82 लाख पौधरोपण

महाराष्ट्र सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार  वन विभाग ने लोगों की सहभागिता से वर्ष 2016 में 2 करोड़ का लक्ष्य निर्धारित कर 2 करोड़ 82 लाख पौधरोपण किया। इसे पहली बार  लिम्का बुक ऑफ रेकॉर्ड ने दर्ज किया। दूसरी बार वर्ष 2017 में 4 करोड़ के लक्ष्य को जनसहभागिता से बारिश के मौसम में 5 करोड़  43 लाख पौधे राज्य में लगाए गए और इसने भी लिम्का बुक ऑफ रेकॉर्ड में जगह बनाई। तीसरी बार मैग्रोव की स्वच्छता को लेकर व विभाग को फरवरी महीने में इसका प्रमाणपत्र दिया जाएगा। स्वच्छ मैग्रोव अभियान का क्रियान्वयन वर्ष 2015 में शुरू किया गया था। इसमें मुंबई, नवी मुंबई, बांद्रा, वर्सोवा, दहिसर, शिवडी, एरोली,भांडूप, गोराई, वाशी के विभिन्न जगहों पर मैग्रोव की स्वच्छता की गई। इसमें 11.03 कि.मी का समंदर और खाडी क्षेत्र से 8 हजार टन कचरा संकलित किया गया। इसमें 25 हजार लोगों ने भाग लिया। यह शहरी वनक्षेत्र स्वच्छता का भारत में सबसे बड़ा कदम था। इस तरह से तीसरी बार वन विभाग के कार्यों को लिम्का बुक ऑफ रेकॉर्ड ने दर्ज कर सम्मान दिया है। 

मुंबई यह देश की आर्थिक राजधानी तो है ही, लेकिन यह शहर विश्व में बड़ा मैग्रोव क्षेत्र का भी शहर है। इस मैग्रोव में प्लास्टिक और कचरा जमा होने से यह बड़े पैमाने पर नष्ट होता है, इसे ध्यान में लेते हुये प्रमुखता से इस अभियान का प्रतिपूर्ति की गई है। इसका लाभ मच्छिमार बंधुओं को भी हुआ है।  मैग्रोव कक्ष, जनसहभाग, शालेय-महाविद्यालयीन छात्र, स्थानीय नागरिक और स्वयंसेवी संस्थाओं की सहभागिता से यह कार्यक्रम सफल हुआ है। मैग्रोव कक्ष के साथ-साथ सामान्य मुंबईकर, स्वयंसेवी संस्थाओं का कार्य भी बहुत महत्वपूर्ण है। 

वन मंत्री मुनगंटीवार ने इसका श्रेय जनता को दिया है। भारतीय वनस्थिति रिपोर्ट 2015 के अनुसार राज्य का मैग्रोव क्षेत्र 22 वर्ग किलोमीटर था, जो वर्ष 2017 में बढ़कर 304 वर्ग किलोमीटर हो गया है। इसमें 82 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि   प्रमुखता से रायगड, मुंबई उपनगर और ठाणे जिले में है। मैग्रोव क्षेत्र में यह भारी वृद्धि दर्ज होने से महाराष्ट्र देश का प्रथम क्रमांक का राज्य बन गया है। 

महाराष्ट्र को 720 कि.मी. लंबाई का विशाल समुद्री किनारा है। तटीय इलाकों और समुद्र के पर्यावरण को संभालना  महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। मैग्रोव के महत्व को समझकर महराष्ट्र सरकार ने वर्ष 2013 में सभी सरकारी मैग्रोव भूमि को आरक्षित  वन का दर्जा दिया है। साथ ही वन विभाग के अंतर्गत स्वतंत्र मैग्रोव कक्ष और फाऊंडेशन की स्थापना की गई है। महाराष्ट्र में मुंबई शहर, मुंबई उपनगर, रायगड, रत्नागिरी, सिंधुदूर्ग  ठाणे जिले को मिलाकर 304 वर्ग किलोमीटर मैग्रोव है। अब तक 15 हजार 088 हेक्टेयर सरकारी भूमि पर एवं 1775 हेक्टेयर निजी क्षेत्र के मैग्रोव को आरक्षित वन का दर्जा दिया गया है। 


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