सरकारी स्कूलों में शुरू होंगे ‘ओजस अंतर्राष्ट्रीय स्कूल’

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मुंबई- सरकारी स्कूलों का शिक्षा स्तर बढ़ाने के लिए राज्य सरकार नया प्रयोग करने जा रही है। इस शैक्षणिक वर्ष 2018-19 से राज्य में 13 ‘ओजस अंतर्राष्ट्रीय स्कूल’ शुरू किए जाएंगे। अगले शैक्षणिक वर्ष में प्रदेश में 100 स्कूल शूरु करने की घोषणा स्कूली शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े ने की है।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा क्षेत्र में अग्रणी सिंगापुर, हांगकांग, जापान जैसे देशों की शिक्षा प्रणाली का अध्ययन करने के बाद ओजस योजना बनाई गई है। पहले चरण में 13 ‘ओजस’ स्कूलों का चयन किया गया है। आनेवाले दिनों में यह स्कूल मार्गदर्शक के तौर पर काम करेंगे। इन स्कूलों के शिक्षकों को पहले चरण में सरकार की ओर से प्रशिक्षण दिया जाएगा।
सहयाद्री गेस्ट हाऊस में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए तावड़े ने बताया कि राज्य के विद्यार्थी 21 वीं सदी की चुनौतियों का सामना कर सकें और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने यह योजना बनाई है। निकाय संस्थाओं, आदिवासी विकास विभाग व सामाजिक न्याय विभाग, स्कूली शिक्षा विभाग के स्कूलों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के 100 स्कूल शुरू करने का निर्णय सरकार ने लिया है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा क्षेत्र में अग्रणी सिंगापुर, हांगकांग, जापान जैसे देशों की शिक्षा प्रणाली का अध्ययन करने के बाद ओजस योजना बनाई गई है। पहले चरण में 13 ‘ओजस’ स्कूलों का चयन किया गया है। आनेवाले दिनों में यह स्कूल मार्गदर्शक के तौर पर काम करेंगे। इन स्कूलों के शिक्षकों को पहले चरण में सरकार की ओर से प्रशिक्षण दिया जाएगा। अगले चरण में इन स्कूलों के मार्गदर्शन में नए अंतर्राष्ट्रीय स्तर के स्कूल शुरू किए जाएंगे। प्रायोगिक पथदर्शी परीक्षण के तहत कक्षा पहली से तीसरी तक का पाठ्यक्रम तैयार कर लिया गया है। चरणबद्ध तरीके से सभी कक्षाओं के पाठ्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं। इन स्कूलों के पाठ्यक्रम के लिए स्वतंत्र और स्वायत्त ‘महाराष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा मंडल’ बनाया गया है।
तावड़े ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर स्कूलों के लिए एक समिति बनाई गई है। समिति की पहली बैठक हाल ही में संपन्न हुई है।  Local to Global  और Known to Unknown उद्देश्य को लेकर इन स्कूलों का काम शुरू रहेगा। एनसीईआरटी और एससीईआरटी के पाठ्यक्रमों की तर्ज पर पाठ्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं। यह पाठ्यक्रम ज्ञान, अभिव्यक्ति, उपयोजन, कौशल और आचरण इन 5 प्रमुख आधार स्तंभों पर आधारित होगा। पाठ्यक्रम में साक्षरता, वाचन, लेखन, संभाषण, श्रवण, गणना, वित्त, कला, शारीरिक शिक्षा और पर्यावरण विज्ञान विषयों का समावेश प्रस्तावित है। तावड़े के मुताबिक आगामी जून से शुरू होनेवाले 13 स्कूलों के लिए 70 शिक्षकों का चयन किया गया है। उन्हें लगातार 22 दिन का प्रशिक्षण दिया गया है। मराठी भाषा के साथ अंग्रेजी और अन्य भाषाओं पर प्रभुत्व बढ़ानेवाली शिक्षा इन स्कूलों में दी जाएगी। अंतर्राष्ट्रीय स्तर का स्कूल तोरणमाल में शुरू किया गया है। प्रदेश में और 12 स्थानों पर यह स्कूल शुरू किए जाएंगे।
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