#MalnutritioninMaharashtra

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मुंबई. विधान परिषद में विपक्ष के नेता धनञ्जय मुंडे ने प्रश्न काल के दौरान आरोप लगाया कि राज्य सरकार आंगनवाड़ी सेविकाओं को मेस्मा (महाराष्ट्र आवश्यक सेवाएं रखरखाव अधिनियम) के तहत ला कर उनका दमन कर रही है. विधान परिषद् में विपक्ष नेता धनञ्जय मुंडे द्वारा नियम 97 के तहत राज्य के आंगनवाडी सेविकाओं कि मौजूदा स्थित उनकी समस्या आदि को लेकर चर्चा उपस्थित की गई थी .

पंकजा मुंडे, महिला एवं बाल विकास मंत्री, महाराष्ट्र शासन

राज्य को कुपोषण मुक्त करने के लिए आंगनवाडी सेविकाओं को मेस्मा (महाराष्ट्र आवश्यक सेवाएं रखरखाव अधिनियम) के तहत लाया गया है ना कि उनकी आवाज दबाने के लिए – पंकजा मुंडे

राज्य में आंगनवाडी सेविकाओं को मेस्मा कानून के भीतर लाने के मामले पर राज्य कि महिला बाल विकास मंत्री पंकजा मुंडे ने कहा कि राज्य को कुपोषण मुक्त करने के लिए आंगनवाडी सेविकाओं को मेस्मा (महाराष्ट्र आवश्यक सेवाएं रखरखाव अधिनियम) के तहत लाया गया है ना कि उनकी आवाज दबाने के लिए. पंकजा ने मंगलवार को विधान परिषद् में कहा कि आंगनवाडी सेविकाओं कि सभी मांगे पूरा करने के बाद ही उन्हें मेस्मा कानून के दायरे में लाया गया है.

जिसके जवाब में बोलते हुए पंकजा ने कहा कि राज्य में गर्भवती महिलाओं , कमजोर बच्चों एवं गरीब बच्चों को पोषण युक्त आहार प्रदान करने के लिए आगनावादी सेविकाये काम करती है . पंकजा ने आंगनवाडी सेविकाओं कि तारीफ करते हुए कहा कि उनके प्रयास से इस वर्ष राज्य में कुपोषण का प्रमाण भी 19 प्रतिशत कम हुआ है .जो सरकार के लिए और मेरे भी एक बड़ी उपलब्धी है . सरकार आंगनवाडी सेविकाओं के लिए सकारात्मक विचार करती है . इतना ही नहीं उनके मानधन में ऐतिहासिक बदलाव हुआ है . वर्ष २०१४ में उन्हें 4 हजार रूपये मानधन के रूप में मिलता था लेकिन युति सरकार ने उन्हें २५०० कि वृद्धि कर ६५०० रूपये मानधन दे रहा है .उनके वेतन के लिए १२६ करोड़ रुपए वितरित किए गए है . सरकार उनके मानधन में और वृद्धि पर विचार भी कर रही है . सरकार ने उनकी मांगों के अनुसार आंगनवाडी सेविकाओं कि सेवानिवृत आयु भी ६० वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष कर दिया है . इस बीच उनके स्वास्थ्य आदि पर पूरा जोर दिया जायेगा .

पंकजा ने इस मौके अपर कहा कि राज्य में सरकार द्वारा चलायें जा रहे एकात्म बालविकास योजना को बल मिल रहा है .आंगनवाडी सेविकाओं द्वारा छोटे बच्चों , गर्भवती महिलाओं ,नवजात शिशु एवं माताओ को पोषण आहार दिया जाता है उनकी देखरेख , स्वास्थ्य सेवाएं एवं अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ प्रदान कराया जाता है . ऐसे में राज्य को स्वास्थ्य बनाने में उनका भी बड़ा योगदान है .कुपोषण संवेदनशील विषय है ऐसे में राज्य में कभी भी आन्दोलन के चलते कोई समस्या ना खडी हो और कुपोषण मुक्त महाराष्ट्र अभियान में रूकावट ना आएं इस उद्देश्य से इन्हें उक्त कानून के दायरे में लाया गया है .

इस मौके अपर आंगनवाडी सेविकाओं के वेतन के मुद्दे पर बोलते हुए पंकजा ने कहा कि अब इन्हें वेतन पी ऍफ़ एम एस प्रणाली से प्रदान किया जायेगा . आधार कार्ड व अन्य कारणों से जिस कि सेविका का बैंक में खता नहीं खुला होगा . उन्हें भी अब सीधे वेतन दिया जायेगा . वर्ष २०१८ से पुराणी पद्धति से भी वेतन जारी किया जायेगा ऐसे में किसी को वेत्तन के लिए परेशां नहीं होना होगा .

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