मराठा आरक्षण को लेकर सामूहिक इस्तीफा दे सकते हैं कांग्रेस विधायक 

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मुंबई- मराठा आरक्षण को लेकर चल रहे हिंसक आंदोलन के बीच प्रदेश में सियासी उठापठक भी तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है मराठा आरक्षण को लेकर महाराष्ट्र कांग्रेस के विधायक सामूहिक इस्तीफा दे सकते हैं। सोमवार को पार्टी प्रदेश मुख्यालय में संगठन के विधायकों ने बैठक की, जिसमें यह फैसला लिया। प्रदेश इकाई की ओर से पार्टी आलाकमान को सामूहिक इस्तीफा देने के संबंध में अनुमति देने का पत्र भेजा गया है।

पार्टी आलाकमान की ओर से अनुमति का इंतज़ार

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पार्टी आलाकमान की ओर से अनुमति मिलते ही पार्टी के विधायक सामूहिक इस्तीफा दे सकते हैं।  हालांकि अभी पार्टी की ओर इस संबंध में खुलासा नहीं किया गया है। याद दिला दें कि बीेते दिनों पार्टी प्रदेश अध्यक्ष अशोक चव्हाण ने मराठा आरक्षण के लिए राज्य सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए भाजपा के साथ गठबंधन में शामिल शिवसेना सहित अन्य दल और निर्दलीय विधायकों से राज्य सरकार से समर्थन वापस लेने का अनुरोध किया था। दादर स्थित तिलक भवन में सोमवार को कांग्रेस नेताओं की बैठक हुई, इसमें विधानमंडल के दोनों सदनों के पार्टी सदस्य मौजूद थे। बैठक में विधान सभा में विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल, पूर्व मुख्यमंत्री एवं पार्टी प्रदेशाध्यक्ष अशोक चव्हाण, पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण, पूर्व उपसभापति माणिकराव ठाकरे सहित पार्टी के विधायक मौजूद थे। बैठक के बाद कांग्रेस के शिष्टमंडल ने राज्यपाल सी. विद्यासागर राव और राज्य पिछड़ा आयोग के अध्यक्ष से मुलाकात करके मांगों का ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया मराठा आरक्षण का मामला कई वर्षो से लंबित है। जिससे समुदय के लोगों में आक्रोश है। पिछले दो सप्ताह से सभी जगह आक्रोश नजर आ रहा है। मराठा, धनगर, महादेव कोली, लिंगायत जैसे विभिन्न समाज के आरक्षण के संदर्भ में भी ठोस निर्णय नहीं लिया जा रहा है।

कांग्रेस के ज्ञापन के मुताबिक राज्य पिछड़ा आयोग की रिपोर्ट के कारण मामला कोर्ट में उलझा हुआ है। मराठा समाज के सर्वे का काम पांच संस्थाओं को दिया गया है, लेकिन उनकी रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। राज्य की सरकार की ओर से पिछड़ा आयोग को पर्याप्त निधि और मनुष्यबल न दोने के कारण रिपोर्ट मिलने में छह महीने से ज्यादा विलंब हुआ है। हाईकोर्ट में हलफनामा देने में राज्य सरकार ने डेढ़ साल का विलंब हुआ। मु्स्लिम आरक्षण में भी सरकार का रवैया ढुलमुल है। राज्यपाल से मांग की गई है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और राज्य सरकार को निर्देश दें कि मराठा समाज सहित अन्य समुदाय के लोगों को जल्द आरक्षण दिया जाए। अन्यथा आंदोलन भड़कने पर कानून-व्यवस्था बिगड़ने की जवाबदारी सरकार की होगी।
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