मराठा आरक्षण: 18 जनवरी तक हलफनामा पेश करने का निर्देश

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मुंबई- बांबे हाईकोर्ट ने सोमवार को मराठा आरक्षण को लेकर दायर की गई विपक्ष की याचिका पर सुनवाई की, लेकिन फैसला नहीं हो सका। कोर्ट ने 18 जनवरी 2019 तक राज्य सरकार को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। इस मामले पर अगली सुनवाई  23 जनवरी 2019 को होगी। 

अगली सुनवाई  23 जनवरी 2019

राज्य सरकार का पक्ष न रखे जाने के बाद हाईकोर्ट ने 18 जनवरी तक के लिए सुनवाई को स्थगित कर दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को 18 जनवरी तक इस मामले में हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है। मराठा आरक्षण के संदर्भ में अपना पक्ष रखने के लिए राज्य सरकार ने अधिक समय मांगा था, लेकिन सरकार की इस मांग को ठुकराते हुए कोर्ट ने 18 जनवरी तक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। न्यायाधीश रणजीत मोरे ने कहा कि मराठा आरक्षण के संबंध में पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है। सरकार को शुक्रवार तक अपना पक्ष रखना ही होगा।

याद दिला दें कि बीते सत्र में महाराष्ट्र सरकार ने मराठा समाज को सरकारी नौकरी और शिक्षा में 16 फीसदी आरक्षण देने वाले विधेयक को पारित किया था।  मुस्लिम संगठनों और विपक्षी राजनीतिक पार्टियों की ओर इसे कोर्ट में चुनौती दी गई है। मराठा आरक्षण के संदर्भ में याचिकाकर्ताओं की ओर से जो संदेह जताया गया है, सरकार ने उसका स्पष्ट जवाब नहीं दिया है। पिछली सुनवाई में हाई कोर्ट ने 11 जनवरी तक सरकार को हलफनामा पेश करने का  निर्देश दिया था। लेकिन सरकार की ओऱ से अपना पक्ष नहीं रखा जा सका। एमआईएम के विधायक इम्तियाज जलील ने मराठा आरक्षण को उच्च न्यायालय में चुनौती देते हुए आर्थिक आधार पर दिए गए आरक्षण को रद्द करने की मांग की है। 

इसके अलावा जयश्री पाटिल ने भी मराठा आरक्षण कानून के खिलाफ याचिका दाखिल की है। याचिकाकर्ता जयश्री पाटिल के वकील गुणरत्न सदावर्ते ने न्यायालय से अनुरोध किया था कि इस मामले की सुनवाई न्यायाधीश रणजीत मोरे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष न की जाए। हालांकि उनके अनुरोध को खारिज करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि मराठा आरक्षण के संदर्भ में दाखिल की गई सभी याचिकाओं की सुनवाई 23 जनवरी को न्यायाधीश रणजीत मोरे और न्यायाधीश भारती डांगरे की खंडपीठ के समक्ष होगी।


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