मराठा आंदोलन: छह मराठा विधायकों ने सौंपे इस्तीफे

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मुंबई- आरक्षण और अन्य मांगों को लेकर पिछले कई दिनों से मराठा समुदाय का आंदोलन जारी है। अब इस आंदोलन को मराठा समुदाय के विधायकों का भी समर्थन मिल रहा है। विधायकों का इस्तीफा देने का सिलसिला शुरू हो गया है। अभी तक विभिन्न दलों के छह विधायकों ने इस्तीफे दिए हैं। हालांकि विधानसभा अध्यक्ष हरीभाऊ बागड़े ने संवैधानिक नियमों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि शीतकालीन सत्र से पहले इस्तीफे स्वीकार नहीं किए जा सकते।

मराठा आंदोलन ने बढ़ाई राज्य सरकार की मुश्किलें, शीत सत्र से पहले नहीं मंजूर होंगे इस्तीफे, सी एम फडणवीस के इस्तीफे की मांग 

अध्यक्ष बागड़े ने साफ किया है कि यदि कोई विधायक इस्तीफा देता है, तो उसे सदन में पढ़कर सुनाया जाता है। इसके बाद इस्तीफा स्वीकार करने या न करने पर फैसला लिया जाता है। इसके बाद चुनाव आयोग की सूचित किया जाता है। लिहाजा 19 नवंबर को शीत सत्र शुरू होने से पहले इस्तीफा मंजूर नहीं हो सकेगा।  याद दिला दें कि मराठा आरक्षण की मांग को लेकर शिवसेना के विधायक हर्षवर्धन जाधव, एनसीपी विधायक रमेश कदम, कांग्रेस के विधायक भारत भालके, एनसीपी विधायक भाऊसाहेब चिकटगांवकर ने विधान सभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंपा है। इसीतरह भाजपा की महिला विधायक सीमा हिरे, विधायक राहुल अहेर ने गुरुवार को मराठा क्रांति मोर्चा के समन्वयक के पास अपना इस्तीफा दिया। दोनों ने कहा है समाज बड़ा होने के कारण, उन्होंने मराठा क्रांति मोर्चा को अपना इस्तीफा सौंपा है। औरंगाबाद के भाजपा जिलाध्यक्ष एकनाथ जाधव ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। विधायकों द्वारा दिए जा रहे इस्तीफे से राज्य सरकार का सिरदर्द बढ़ गया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की कार्य़शैली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। भाजपा की सहयोगी पार्टी ने मुख्यमंत्री को आड़े हाथों लेते हुए कहा है मराठा आंदोलन के समय फडणवीस 24 घंटे तक कहां अदृश्य रहे। विधायक संदीपन भुमरे ने मुख्यमंत्री का इस्तीफा मांगा है। मराठा क्रांति मोर्चा मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है। इधर विधायकों का एक गुट मुख्यमंत्री फडणवीस के समर्थन में उठ खड़ा हुआ है। कई विधायकों ने प्रकरण कोर्ट में होने का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस की पैरवी की है। महिला व बाल कल्याण मंत्री पंकजा मुंडे का कहा कि यदि मराठा आरक्षण की फाइल उनके टेबल पर होती तो वे बिना विलंब आरक्षण को मंजूरी दे देती। यह प्रकरण हाईकोर्ट में लंबित है। लिहाजा देर हो रही है। उन्होंने मराठा समुदाय से अनुरोध किया कि शेरों बिना वजह अपनी जान न गवाएं, यदि जान लेनी है तो हमारी लो।
इधर तीसरे दिन भी मराठा आंदोलन राज्य के कई हिस्सों मेें जारी रहा। सांगली, हिंगोली, दौंड और सिंधदुर्ग में आंदोलन हिंसक हो गया। आंदोलनकारियों ने कई वाहनों और बसों में तोड़फोड़ की और कई बसों में आग लगा दी। उत्पात मचा रहे लोगों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। इधर मामले का हल निकालने के लिए सरकार की ओर से बैठकों का दौर जारी रहा।
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