आरक्षण के नाम पर मराठों को धोखा- कांग्रेस 

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मुंबई- आरक्षण के नाम पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मराठा युवाओं को धोखा दिया है। यह आरोप कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक चव्हाण ने लगाया है। उन्होंने आरक्षण के नाम पर झूठा आश्वासन देने के लिए फडणवीस से  मराठा समाज से माफ़ी मांगने की मांग की है। उन्होंने आरक्षण के लिए विशेष सत्र बुलाने की मांग की है।

मराठा समाज से माफ़ी मांगने की मांग

चव्हाण ने कहा कि आंदोलन के बाद फडणवीस मराठा नेताओं को चर्चा के लिए बुला रहे हैं। अब समय चर्चा करने का नहीं, बल्कि कानून बना कर मराठा युवाओं को आरक्षण देने का है। चव्हाण ने मराठा युवाओं के आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा कि अब फडणवीस को बिना आधार के बयान देने की जगह आरक्षण को लागू करने की दिशा में काम करना चाहिए। सरकार मराठा व अन्य समाज के लोगों के बीच संघर्ष निर्माण खड़ा करना चाहती है। भाजपा सरकार की मंशा वोटों का ध्रुवीकरण करने की है। भीमा – कोरेगांव की हिंसा के दौरान मराठा व दलित के बीच संघर्ष निर्माण की स्थिति खड़ी की गई। आम लोगों से मेरी अपील है कि समाज को बांटने वाली शक्तियों के खिलाफ हमें एकजुट होना चाहिए।

पूर्व मुख्यमंत्री चव्हाण ने आरक्षण की मांग करने वाले काका साहेब शिंदे व जगन्नाथ सोनावणे की मौत के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि सरकार बनाने के बाद फडणवीस सरकार ने पहली कैबिनेट बैठक में धनगर समाज को आरक्षण देने का आश्वासन दिया था। परंतु  साढ़े तीन साल बीत जाने के बाद भी उन्हें आरक्षण नहीं मिला है। न्यायालय के फैसले के बाद भी मुस्लिम समाज को आरक्षण नहीं दिया गया है।

अशोक चव्हाण ने मराठा आरक्षण पर चर्चा करने के लिए सरकार से एक दिन का विधान मंडल का विशेष सत्र को बुलाने की मांग की है। इस सत्र के दौरान मराठा आरक्षण पर चर्चा होनी चाहिए। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार का सहयोग देने के लिए तैयार है।

इस बीच विधानसभा में नेता विपक्ष राधाकृष्ण विखे पाटिल ने आरोप लगाया कि मराठा आंदोलन के बंदोबस्त के दौरान सरकार ने पुलिस व राजस्व विभाग के अधिकारियों की तैनाती उनकी जाति को पूछ कर की है। राज्य के इतिहास में कभी भी किसी कर्मचारी की तैनाती उसके जात के आधार पर नहीं की गई है। यह एक बेहद अपमानजनक मामला है। विखे- पाटिल के मुताबिक पिछले आठ दिनों से मराठा आंदोलन चल रहा था। ऐसे में सरकार ने उन्हें पहले चर्चा के लिए क्यों नहीं बुलाया। पाटिल ने इस मामले में शिवसेना पर दोहरी भूमिका का आरोप लगाया। एक तरफ शिवसेना मराठा आंदोलन का समर्थन कर रही है और दूसरी तरफ सरकार में शामिल है। यदि मराठा आरक्षण को लेकर शिवसेना वाकई में गंभीर है तो उन्हें सरकार से अलग होकर मराठा समाज का  समर्थन करना चाहिए।

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