master stroke by CM Fadnavis

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उन्नीस विपक्षी विधायकों का निलम्बन
फडनवीस ने शिवसेना के पर क़तरे
‘Between The Lines’ by Deepak Pachory

भाजपा और शिवसेना की दूरियाँ बढ़ती जा रही हैं। नगरपालिका चुनाव अलग अलग लड़ने और मुंबई महानगर पालिका से महापौर के पद को लेकर हुई तानातनी के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने एक बार फिर गठबंधन की गरिमा बचाए रखने के लिए शिवसेना को मुंबई महापौर का पद दे दिया। सूत्रों के मुताबिक़, ज़िला परिषद चुनावों में शिवसेना के कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस के साथ मिल कर चुनाव लड़ने के बाद से ही देवेंद्र फडनवीस सतर्क हो गए थे। उन्हें समझ में आ गया था कि शिवसेना उनकी सरकार के लिए ख़तरा बन सकती है। अगर शिवसेना ने समर्थन वापस लिया तो विधानसभा में शिवसेना के बिना बहुमत हासिल करना भाजपा के लिए नामुमकिन होगा।

नए गठबंधन और बढ़ी हुई शक्ति के मद में विपक्ष ने सरकार पर दबाव डालने के लिए किसानों के मुद्दे को पुरज़ोर से उठाया। उनका इरादा बजट को अटकाने का था। विपक्ष ने थाली में परोस कर एक आसान मौक़ा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस को दे दिया और फडनवीस ने मास्टर स्ट्रोक खेलने में कोई चूक नहीं की। एक तीर से दो निशाने लगे। बजट सत्र तो सुरक्षित हुआ ही हुआ, भाजपा सरकार भी नौ महीने के लिए सुरक्षित हो गयी है।

विधानसभा में बीजेपी-122, निर्दलीय-7, रासपा-1 और बहुजन विकास अघाड़ी-3 मिलाकर 133 विधायक थे। वहीं शिवसेना-63, कांग्रेस-42, एनसीपी-41 मिलाकर 146 विधायक हो रहे थे। अब विपक्ष के 19 विधायक निलंबित होने से विपक्ष की संख्या घटकर 127 रह गई है।

बीजेपी ने विधायकों के निलंबन के मुद्दे की शिवसेना और उसके मंत्रियों को भनक तक लगने नहीं दी। वहीं बीजेपी विधायकों को व्हीप जारी कर सदन में मौजूद रहने को कहा। जिस समय प्रस्ताव पेश हुआ बीजेपी के सभी विधायक सदन में थे, वहीं शिवसेना के मात्र दो विधायक सदन में मौजूद थे।

जिन विधायकों को निलंबित किया गया है उनमें कांग्रेस के अमर काले, विजय वाडेतिवार, हषर्वर्धन सकपाल, अब्दुल सत्तार, डीपी सावंत, संग्राम थोप्टे, अमित जनक, कुणाल पाटिल, जयकुमार गोरे और राकांपा के भास्कर… जाधव, जितेन्द्र अवहाद, मधुसूदन केंद्रे, संग्राम जगतप, अवधूत तटकरे, दीपक चव्हाण, दत्ता भरने, नरहरि जीरवल, वैभव पिचाड और राहुल जगतप शामिल हैं।

निलंबित इन विधायकों पर सदन के भीतर हंगामा मचाते हुए बैनर लहराते हुए नारेबाजी करने के साथ अवमान करवे और बजट की प्रति को जलाने जैसी गतिविधियों से सदन की प्रतिमा मलीन होने और अवमान होने का आरोप लगाते हुए यह कार्रवाई की गई।

भाजपा के सूत्रों के मुताबिक़, विपक्ष के 21 विधायकों के निलंबन की योजना पहले से बनी हुई थी और मौक़े की तलाश थी। मगर निलम्बन प्रस्ताव में से कांग्रेस के दो विधायकों नितेश राणे और वीरेंद्र जगताप का नाम हटा दिया गया। इस हृदय परिवर्तन का क्या कारण है इस बात को लेकर राजनीतिक उत्सुकता से बाज़ार गरम है। शायद आने वाले समय में इस बात की गहराई पता चले।

अचानक, पैरों के तले से ज़मीन खींच लिए जाने के बाद शिवसेन में चिंता का माहौल है। शिवसेना ने 19 विधायकों के निलंबन का विरोध किया है। इसके लिए शिवसेना के नेताओं ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर विधायकों का निलंबन वापस लेने की मांग की। इस शिष्टमंडल में परिवहन मंत्री दिवाकर रावते, उद्योग मंत्री सुभाष देसाई, पर्यावरण मंत्री रामदास कदम, विधायक सुनील प्रभू, विधायक विजय अवटी, विधायक अनिल कदम शामिल थे।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने जिस चतुराई के साथ शिवसेना हैंडले किया है वो भाजपा में चर्चा का विषये है। विधानसभा के आँकड़ों को देखें तो शिवसेना को अगर सत्ता से विमुक्त भी कर दिया जाए तो नौ महीने तक भाजपा सरकार को कोई ख़तरा नहीं होगा। और जिस तरह से अभी तक फडनवीस खेल रहे है, शिवसेना को सरकार से अगर वो मुक्त भी कर देते हैं तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी। फडनवीस का अगला क़दम क्या होगा, भाजपा से ज़्यादा अब शिवसेना में इस बात को लेकर विचार मंथन हो रहा होगा।

दीपक पचोरी
एडिटर इन चीफ़

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