उद्योग मंत्री देसाई को मंत्री पद से हटाने की मांग !

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– एमआईडीसी जमीन घोटाला- 
मुंबई- विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष राधाकृष्ण विखे पाटिल ने  महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडल (एमआईडीसी) घोटाले के तथाकथित आरोपी उद्योग मंत्री सुभाष देसाई को मंत्री पद से हटाने की मांग की है। विखे पाटिल ने सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य सचिव केपी बक्षी की रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि जांच में एमआईडीसी घोटाला साबित हो गया है। लिहाजा देसाई को तत्काल मंत्रिमंडल से हटाया जाना चाहिए।
राज्य सरकार ने 1 जनवारी 2015 से 31 मार्च 2017 की कालावधि में एमआईडीसी के लिए 14 हजार 219 हेक्टेयर जमीन अधिसूचित की थी। परंतु उसके बाद किसानों का विरोध बताकर, उसमें से करीब 90 प्रतिशत यानी 12 हजार 429 हेक्टेयर जमीन गैर-अधिसूचित की गई ।
विखे पाटिल के मुताबिक मौजूदा उद्योग मंत्री देसाई ने किसानों के विरोध बताकर एमआईडीसी की जमीन स्वस्तिक प्रॉपर्टी, मुंबई को दे दी। यह फर्म मुंबई की भवन निर्माता कंपनी है, जिसकी कई गृहनिर्माण परियोजनाएं हैं। यह कंपनी किसानों की कैसे हो सकती है। विखे पाटिल ने कहा कि उन्होंने यह मुद्दा बीते साल सदन में उठाया था। विपक्ष की मांग के बाद मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए थे। केपी बक्षी समिति ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को जांच रिपोर्ट दे दी है। देसाई द्वारा बड़ी संख्या में जमीन गैर-अधिसूचित करते समय उद्योग विभाग और एमआईडीसी के लिखित अभिप्राय में गड़बड़ी किया जाना रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ है। जमीन गैर-अधिसूचित करने के लिए उद्योग विभाग की सिफारिशें प्रतिकूल होने पर मसला मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाना चाहिए था। लेकिन अपने करीबियों को फायदा पहुंचाने के लिए उद्योग मंत्री ने परस्पर निर्णय लिया। अब देसाई ने  मंत्रिमंडल में बने रहने का नैतिक अधिकार खो दिया है।
विखे पाटिल ने  कहा कि बीते साल उन्होंने जमीन गैर-अधिसूचित करते समय बड़ा आर्थिक घोटाला होने का आरोप लगाया था। राज्य सरकार ने 1 जनवारी 2015 से 31 मार्च 2017 की कालावधि में एमआईडीसी के लिए 14 हजार 219 हेक्टेयर जमीन अधिसूचित की थी। परंतु उसके बाद किसानों का विरोध बताकर, उसमें से करीब 90 प्रतिशत यानी 12 हजार 429 हेक्टेयर जमीन गैर-अधिसूचित की गई । पहले जमीन अधिसूचित करना, उसके बाद आर्थिक घोटाला करना, फिर संबंधित जमीन को अलग करना, यह गोरखधंधा शुरू होने की जानकारी उन्होंने दी थी। इस संदर्भ में नाशिक जिले की इगतपुरी तहसील के गोंदे (दुमाला) का, उन्होंने उदाहरण दिया था।  यहां  अधिसूचित जमीन में से 30 हेक्टेयर जमीन अलग करने के लिए स्वस्तिक प्रॉपर्टी, मुंबई ने उद्योग विभाग से विनंति की थी। उसके आधार पर उद्योग विभाग ने निर्णय लिया था। इस फर्म ने कांग्रेस आघाडी सरकार के कार्यकाल में 16 जनवरी 2012 को यही जमीन गैर-अधिसूचित करने की मांग की थी। उन दिनों मांग को ठुकरा दिया गया था।
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