एमआईडीसी की जमीन पर आयकर वसूली रद्द 

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मुंबई-  महाराष्ट्र औद्योगिक महामंडल  (एमआईडीसी) द्वारा अधिग्रहीत की  गई जमीनों पर  आयकर विभाग कर वसूली नहीं कर सकता । ऐसा महत्वपूर्ण फैसला आयकर (अपीलीय) न्यायाधिकरण ने दिया है। इस फैसले से एमआईडीसी को बहुत बड़ी राहत मिली है ।

एमआईडीसी को बड़ी राहत, आयकर विभाग को करने होंगे 395 करोड़ वापस 

 इस फैसले के बाद  आयकर विभाग को एमआईडीसी से  वसूल किए गए 395 करोड़ रुपए 12 प्रतिशत ब्याज के साथ वापस करने होंगे। साथ पिछले दस वर्ष की 9  हजार करोड़ रुपए की वसूली भी रद्द होगी। इस फैसले का फायदा  महाराष्ट्र सरकार के सिडको, म्हाडा, एमएमआरडीए तथा अन्य मंडलों को होगा । अन्य राज्यों को भी इस फैसले से लाभ होगा।  इस न्यायालयीन प्रक्रिया के समय महामंडल के अध्यक्ष तथा उद्योगमंत्री सुभाष देसाई ने समय-समय पर   मार्गदर्शन किया । आयकर विभाग ने वर्ष 2006 से वर्ष 2016 तक एमआईडीसी द्वारा आवंटित की गई जमीनों पर टैक्स वसूली की थी।  दस वर्ष की यह  रकम 9 हजार करोड़ रुपए होती है। आयकर विभाग ने एमआईडीसी के बैंक खाते सील कर 395 करोड़ रुपए सख़्ती के साथ वसूल किए थे।  इसके विरोध में महामंडल को सर्वोच्च न्यायालय में  स्थगन मिल गया था ।  यह प्रकरण आयकर आयुक्त के पास पुनः सुनवाई  के लिए भेजा गया था ।  परंतु आयकर आयुक्त ने यह प्रकरण वापस कर दिया था। इसके बाद एमआयडीसी ने आयकर आयुक्त के  आदेश के विरूद्ध आयकर विभाग के अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील की थी। 
 
न्यायमूर्ति  जी. एस. पन्नु एवं न्यायमूर्ति की खंडपीठ में मामले की सुनवाई एक सप्ताह तक चली। खंडपीठ ने दस्तावेजों और अधिनियम में किए गए संशोधन के आधार पर फैसला सुनाया कि  एमआईडीसी द्वारा अधिग्रहित जमीन की भाडे़पट्टी पर आय़कर नहीं लगाया जा सकता।  महामंडल के लिए संपादित की गई  जमीन का महामंडल को  केवल कब्जा  मिलता है ।  परंतु जमीन पर  मालिकाना हक  राज्य सरकार का रहता है ।   महामंडल के कार्य सरकार के प्रतिनिधि के रूप में होने से  इस कार्य का स्वरूप व्यावसायिक अथवा लाभ कमाना नहीं है ।  इसलिए महामंडल के पास आने वाली रकम पर  कर निर्धारण करना उचित नहीं है। एमआईडीसी की ओर से  वरिष्ठ कानून विशेषज्ञ वी, श्रीधरन ने पक्ष रखा ।
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