दूध के टैंकर में तोड़फोड़ – रास्ते पर बहाया दूध

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मुंबई- प्रदेश के कई जिलों में दूध की कीमत बढ़ाने के लिए स्वाभिमानी शेतकरी (किसान) संगठन की ओर से जोरदार आंदोलन शुरू कर दिया गया है। इस आंदोलन के तहत पुणे, अमरावती, अहमदनगर, बुलढ़ाणा आदि जिलों में आंदोलनकारियों ने दूध भरे कई टैंकरों में तोड़फोड़ की है और हजारों लीटर दूध रास्ते पर बहा दिया है। यह मामला विविधानमंडल के दोनों सदनों में भी गूंजा। विपक्ष ने सरकार को जमकर घेरा। राज्य  में शुरू दूध आंदोलन का तीव्र प्रतिसाद सोमवार को नागपुर विधान सभा में दिखाई दिया। विपक्ष ने दूध उत्पादक किसानों को अनुदान देने की मांग को लेकर सदन में जमकर हंगामा किया। जिसके चलते सदन का कामकाज तीन बार बाधित हुआ।
दूध की कीमत बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन
दूध के मसले पर विस में हंगामा, विपक्ष का सभा त्याग
स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के अध्यक्ष व सांसद राजू शेट्टी ने देर रात में पंढरपुर में भगवान विठ्ठल व मां माउली की प्रतिमा का दूधाभिषेक कर दूध की कीमत बढ़ाने के लिए आंदोलन की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि भगवान विठ्ठल सरकार को सद्बुद्धि दें, जिससे सरकार दूध उत्पादकों को न्याय दे सके। राजू शेट्टी ने कहा कि दूध का उत्पादन मूल्य 32 रुपये तक पहुंच जा रहा है, जबकि दूध उत्पादकों को सिर्फ 15 से 17 रुपये तक भाव मिल रहा है। इससे दूध उत्पादकों की कमर टूट गई है और यह धंधा समाप्त होने के कगार पर है।
किसान खुद का अस्तित्व बचाने के लिए आंदोलन के लिए बाध्य हुए हैं। राजू शेट्टी ने कहा कि मुख्यमंत्री आषाड़ी एकादशी को यहां दर्शन करने के लिए आने वाले हैं, उस समय क्या करना है? तय करेंगे। राजू शेट्टी ने मुख्यमंत्री के आषाड़ी एकादशी के कार्यक्रम में गड़बड़ी किए जाने का संकेत दिया है। राजू शेट्टी ने शांतिपूर्वक आंदोलन करने की अपील किसानों से की है। राजू शेट्टी ने गाय के दूध पर पांच रुपये अनुदान वह भी किसानों के बैंकखाते में सरकार की ओर से जमा करवाए जाने की मांग किया है।
इधर प्रशासन ने भी अंकुश बनाए रखने के लिए सख्त भूमिका अख्तियार किया है। इसके चलते कोल्हापुर में 50 आंदोलनकारियों को गिरफ्तार किया है। साथ ही पुलिस ने बड़े पैमाने पर आंदोलनकारियों को नोटिस भी जारी किया है। राज्य सरकार की ओर से आंदोलन को तितर-बितर करने के लिए दूध उत्पादकों को नोटिस जारी किया जा रहा है। यदि दूध उत्पादक किसानों का आंदोलन बढ़ता है तो शहरों मेें दूध की किल्लत निर्माण हो सकती है।

दूध उत्पादक किसानों की मांग तुरंत पूरी करो- विपक्ष 

इसबीच, विपक्षी दलों ने राज्य सरकार से दूध उत्पादक किसानों की मांग को तुरंत पूरा करने की मांग की है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक चव्हाण ने कहा कि कांग्रेस दूध उत्पादक किसानों के आंदोलन का समर्थन करती है।

चव्हाण ने आरोप लगाया कि केंद्र व राज्य सरकार की गलत नीतियों की वजह से आज किसानों की हालत बेहद ख़राब हो गई है। इस वजह से किसानों को आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। सरकार को तुरंत किसानों से बात कर समस्या का समाधान निकालना चाहिए। चव्हाण के मुताबिक दूध लोगों के लिए जीवनाश्यक पदार्थ है। यदि इसकी सप्लाई प्रभावित होती है, तो लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।

दूध के मसले पर विस में हंगामा, विपक्ष का सभा त्याग

राज्य  में शुरू दूध आंदोलन का तीव्र प्रतिसाद सोमवार को नागपुर विधान सभा में दिखाई दिया। विपक्ष ने दूध उत्पादक किसानों को अनुदान देने की मांग को लेकर सदन में जमकर हंगामा किया। जिसके चलते सदन का कामकाज तीन बार बाधित हुआ।

सदन का कामकाज शुरू होते ही नेता विपक्ष ने राधाकृष्ण विखे पाटिल ने दूध दर को लेकर चल रहे आंदोलन का मसला स्थगन प्रस्ताव के तहत उठाया। उन्होंने सभी कामकाज रोक कर इस पर चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार ने दूध पाउडर पर अनुदान घोषित किया है, उसका फायदा सहकारी दूध संघ को होगा। राज्य  में दूध संकलन बंद है। सरकार  बंदूक की जोर पर किसानों के आंदोलन का चिरफाड़ करने का प्रयास कर रही है। सरकार दूध के लिए न्यूनतम दर तीस रुपए प्रति लीटर घोषित करे और प्रति लीटर पांच रूपए अनुदान किसानों की खाते में जमा कराए।

शिवसेना विधायक सुनील प्रभु ने कहा कि सरकार  गांरटी दे की आगे से दूध उत्पादक किसानों का दूध फेंका नहीं जाएगा। सरकार किसानों को न्याय दें। शिवसेना सहित अन्य विधायकों की मांग पर राजस्व मंत्री चंद्रकांत दादा पाटिल ने कहा कि सहकारी दूध संघ  दूध का संकलन बंद करके किसानों के लिए संकट पैदा कर रहे है। यह किसान विरोधी आंदोलन है। विरोधी दल के सदस्यों का कहना था कि किसानों के आंदोलन को लेकर सरकार की भूमिका स्पष्ट नहीं है। इस मुददे पर सरकार गंभीर नहीं है। विपक्ष के विधायकों ने  सरकार के विरोध में नारेबाजी करते हुए सभा का त्याग किया।

इससे पहले एनसीपी विधायक अजीत पवार ने कहा कि दूध पाउडर पर घोषित किए गए अनुदान संघ को मिलने वाला है। इससे किसानों का क्या फायदा ऐसा सवाल उपस्थित किया। किसानों को एक लीटर दूध उत्पादन करने में  25 से 30 रुपए खर्च आता है, जबकि प्रत्यक्ष उन्हें 17 से 20 रुपए मिलता है। कर्नाटर की तर्ज पर किसानों को प्रतिलीटर पांच रुपए अनुदान घोषित करे। शिवसेना विधायक चंद्रदीप नरके ने कहा कि गाय के अतिरिक्त दूध का प्रश्न गंभीर है। सरकार इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करे। दूध पाउडर के लिए घोषित अनुदान को साल भर के लिए बढ़ाने की मांग की।

दुग्ध विकास मंत्री महादेव जानकर ने कहा कि केंद्र सरकार निर्यात के लिए दस प्रतिशत अनुदान  देने की घोषणा की है। दूध पाउडर पर घोषित अनुदान आगामी पांच महीने तक बढ़ाने का विचार है। जल्द से जल्द दूध के लिए नीति घोषित की जाएगी। जानकर के जवाब से असंतुष्ट विरोधी दल के सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी। जयंत पाटिल ने दूध पाउडर पर घोषित अनुदान निजी दूध संघ को फायदा पहुंचाने का आरोप सरकार पर लगाया। विधान सभा अध्यक्ष हरिभाऊ बागडे ने हस्तक्षेप करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ एक बार फिर से बैठक करके रास्ता का निकालने का निर्देश दिया। लेकिन विपक्ष का हंगामा जारी रहा। आखिरकार  उन्होंने सभा त्याग कर विरोध जताया ।

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