हथियारों का कुटीर उद्योग 1 – एक बहादुर कौम का अपराधी हो जाना

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पूरे नौ अंकों में देखें और पढ़ें एक समाज के अभिशप्त हो जाने की पूरी खोजी दास्तां…

पहली बार कैमरा उनके हथियार बनाने के कारखानों के अंदर तक पहुंचा है…

हमारा मकसद यह दिखाना नहीं है कि ये समाज कितना खतरनाक काम कर रहा है…

बल्की यह जताना है कि समाज के इतने अहम हिस्से को कैसे हमने खुद से दूर कर दिया…

ये एक शूरवीर कौम है… उसे मुख्यधारा में लाना चाहिए… उनके माथे से कलंक का दाग हटाने के लिए समाज को ही कुछ करना होगा…

सरकार को भी महज गाल बजाने से बढ़ कर कुछ करना होगा…

विवेक अग्रवाल की खोजी रपट।

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