मुंबई डीपी प्लान का मामला पहुंचा हाईकोर्ट 

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मुंबई- मुंबई के डीपी प्लान की प्रति मराठी में न होने पर शिवसेना कड़ी नाराजगी जताते आंदोलन किया था। अब इस पर कांग्रेस ने भी तीखे तेवर अपना लिए हैं। कांग्रेस ने ‘बृहन्मुंबई विकास योजना- 2034 ‘ के तहत मुंबई विकास नियंत्रण और प्रवर्तन विनियमावली यानी ‘डीसीपीआर’ मराठी भाषा में प्रकाशित करने की मांग की है। साथ ही ‘डीसीपीआर’ से संबंधित दस्तावेज, ‘डीपी रिपोर्ट’ और ‘डीपी शीट्स’ उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है। इस संबंध में विधानसभा में विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल ने गुरुवार को राज्य सरकार के विरोध में बांबे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
बीते महीने राज्य सरकार ने मुंबई का ‘डीसीपीआर’ जारी किया था। इस पह शिकायतें और सुझाव भेजने के लिए 23 जून तक समय सीमा निर्धारित की गई है। परंतु यह ‘डीसीपीआर’ बेहद क्लिष्ट अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित किया गया है। सामान्य जनता इसे समझ नहीं सकती। यदि जनता ही नहीं समझ पाएगी तो सुझाव और शिकायतें कैसे भेजेगी। मुंबई का ‘डीसीपीआर’ मराठी भाषा में भी प्रकाशित करने की मांग सभी स्तरों से हो रही है।
विखे पाटिल के मुताबिक ‘डीसीपीआर’  मराठी भाषा में प्रकाशित होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि राज्य सरकार मुंबई का विकास करने निकली है, या विनाश करने। पाटिल ने कहा कि बीते महीने राज्य सरकार ने मुंबई का ‘डीसीपीआर’ जारी किया था। इस पह शिकायतें और सुझाव भेजने के लिए 23 जून तक समय सीमा निर्धारित की गई है। परंतु यह ‘डीसीपीआर’ बेहद क्लिष्ट अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित किया गया है। सामान्य जनता इसे समझ नहीं सकती। यदि जनता ही नहीं समझ पाएगी तो सुझाव और शिकायतें कैसे भेजेगी। मुंबई का ‘डीसीपीआर’ मराठी भाषा में भी प्रकाशित करने की मांग सभी स्तरों से हो रही है। विखे पाटिल ने आरोप लगाया कि शिकायतें और सुझाव भेजने की समय सीमा समाप्त होने को है, लेकिन सरकार अभी तक ‘डीसीपीआर’ मराठी भाषा में प्रकाशित नहीं करा सकी है। राजभाषा अधिनियम 1964 के तहत सभी सरकारी कामकाज मराठी भाषा में होने चाहिए। एक तरफ राज्य सरकार कानून का धार लेकर सभी सरकारी काम मराठी भाषा में करने का परिपत्रक निकालती है, तो दूसरी तरफ ‘डीसीपीआर’ केवल अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित किया गया है।
विखे पाटिल ने कहा कि वर्ष 2015 में बांबे हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को सभी कामकाज मराठी में करने का निर्देश दिया था। इसके बाद नगर विकास विभाग ने एक परिपत्रक भी जारी किया था। इस परिपत्रक में विकास योजना और विकास नियंत्रण नियमावली मराठी भाषा में निकालने का स्पष्ट आदेश दर्ज है। विखे पाटिल ने कहा कि ‘डीसीपीआर’ जारी करते समय सरकार ने उसके साथ संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए हैं। सरकार की नीति, नियोजन, भौगोलिक और जनसंख्या की आकड़ेवारी स्पष्ट करनेवाली ‘डीपी रिपोर्ट और विकास के प्रारूप का नक्शा यानी ‘डीपी शीट्स’ अभी भी उपलब्ध नहीं कराई गई है। लिहाजा पूरा ‘डीसीपीआर’ तकनीकी दृष्टिकोण से जनता के सामने नहीं आया है। विखे पाटिल ने ‘डीसीपीआर’ मराठी भाषा में सार्वजनिक करने के बाद, शिकायतें और सुझाव मंगाने की तारीख बढ़ाने की मांग याचिका में की है।
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