मुंबई का नया डीपी प्लान सार्वजनिक, भड़की कांग्रेस 

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मुंबई, किफायती मकानों की उम्मीद लगाए बैठे मुंबईवासियों के लिए राहत की खबर है। मुंबई के नए डीपी प्लान में सॉल्ट पैन (खार जमीन) और नॉन डेवलपमेंट जोन की जमीन घर बनाने के लिए खुली की जाएगी। इससे 10 लाख सस्ते मकान बनाने के साथ ही 80 लाख रोजगार के अवसर प्रदान करने का दावा किया गया है। बुधवार को मंत्रालय में प्रेस वार्ता का आयोजन कर मनपा आयुक्त अजोय मेहता, गृहनिर्माण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय कुमार और शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिव नितीन करीर ने नए डीपी प्लान के बारे में विस्तृत जानकारी दी। डीपी के अधिकांश हिस्से को जून से लागू किया जाएगा।
इसबीच, कांग्रेस ने मुंबई के नए डीपी प्लान पर आपत्ति जताई है। कांग्रेस का आरोप है नए विकास प्लान से बिल्डरों को फायदा होगा। बीपीटी जमीन का आरक्षण समाप्त करके घोटाले किए जाने की संभावना है। जमीनों को बड़े बिल्डर और रियल इस्टेट को देने की साजिश रची गई है। कांग्रेस के मुंबई अध्यक्ष ने संजय निरूपम ने यह आरोप लगाए हैं।
– बनेगें 10 लाख किफायती मकान, मिल कामगारों को मिलेगा 405 वर्ग फुट का मकान 
– मुंबई में 5 एफएसआई, पहाड़ियों, मैंग्रोव, पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्रों में विकास पर रोक 
– मुंबई के नए डीपी प्लान पर भड़की कांग्रेस, बिल्डरों को फायदा पहुंचाने की साजिश 
– बीपीटी जमीन के आरक्षण में घोटाले का आरोप
मुंबई पोर्ट ट्रस्ट (बीपीटी) और कफ परेड में 300 हेक्टेयर का भूखंड थीम पार्क के लिए आरक्षित रखा गया है। कमर्शियल, उद्योग और रिहायशी घरों की एफएसआई बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। डीपी प्लॉन में भूखंड आरक्षण के नाम बदलकर निवासी, कमर्शियल, विशेष विकास क्षेत्र, हरा और प्राकृतिक क्षेत्र किए गया है। किसानों के लिए साप्ताहिक बाजार की जगह का प्रावधान किया गया है। मुंबई की संकरी गलियों को 9 मीटर तक चौड़ा बनाने की लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को डीपी प्लान को मंजूरी दी थी। मुंबई मनपा की महासभा की तरफ से मंजूर डीपी प्लॉन में राज्य सरकार की जांच समिति ने कई बदलाव किए हैं। मुंबई में 330 हेक्टेयर खार जमीन और 3350 हेक्टेयर नॉन डेवलपमेंट जोन को पहली बार विकास के लिए खुला किया गया है। इस जमीन पर तकरीबन 10 लाख किफायती घर बन सकेंगे। आरक्षित जमीन को मुंबई मनपा के कब्जे में लेने के लिए जमीन मालिकों को पैसा न देकर अतिरिक्त एफएसआई और विकास हस्तांतरण अधिकार (टीडीआर) दिया जाएगा। डीपी के अधिकांश हिस्से को जून से लागू किया जाएगा, जबकि जिन जगहों पर छानबीन समिति के सुझाव पर अमल में किया जा रहा है, वहां जनसुनवाई के बाद अलग से लागू किया जाएगा।
 मुंबई में 42 खुली जगह को रद्द करने का प्रस्ताव था, इसे पूरी तरह से खारिज कर दिया गया है। वर्ष 1991 में आरक्षित रखे गए 124 खाली भूखंड डीपी प्लान में गायब हो गए थे। इससे 42 हेक्टेयर भूखंड वापस मिली है। डीपी प्लान में गोरगांव स्थित आरे कॉलोनी में 34 हेक्टयेर जमीन पर मेट्रो कारशेड का आरक्षण कायम रखा गया है। मेट्रो तीन परियोजना के लिए आरे में जगह आरक्षित रखी गई है। गांवठाण, कोलीवाडा और आदिवासी बस्तियों सहित हवाईअड्डे उड़ान क्षेत्र के पुनर्विकास के लिए प्लान में स्वतंत्र नियामवली तैयार की गई है। इसके पहले प्लान के प्रारूप में गांवठाण और कोलीवाडा को छोड़ दिया गया था। जिससे कोली समुदाय नाराज था।
आरे कॉलोनी में पूरी तरह हरित पट्टा रहेगा। सिर्फ मेट्रो कार शेड के लिए जगह छोड़ी जाएगी।  पार्किंग समस्या के हल के लिए पहली बार पार्किंग प्राधिकरण की नियुक्ति की जाएगी। मिल कामगारों के लिए बनने जानेवाले घर अब 405 वर्ग फुट के होंगे। कचरे की समस्या को खत्म करने के लिए मुंबई के प्रत्येक विभाग में कचरा पुर्नप्रक्रिया योजना बनाई जाएगी। बेघर, वृद्धाश्रम, नौकरी करने वाली महिलाओं के हॉस्टल, आधार केंद्र, विकलांगों के लिए विशेष प्रावधान, किसानों के लिए साप्ताहिक बाजार के लिए जगह आरक्षित की जाएगी। नया डीसीआर वर्तमान में चल रहे प्रॉजेक्ट पर भी लागू होगा । फेरीवालों के बैठने की व्यवस्था की जाएगी। इसीतरह 12 हजार 700 हेक्टेयर में नैसर्गिक आरक्षित किया गया है। इसके अनुसार पहाड़ियों, मैंग्रोव, पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्रों में विकास नहीं हो सकेगा। महत्वपूर्ण बस स्टापों के पास टॉयलेट बनाने का प्रावधान किया गया है। टेरेस गार्डन बनाने की अनुमति होगी।
कमर्शियल एफएसआई 5 होगी। 80 लाख रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने को लेकर डीपी प्लान बनाया गया है। किफायती घरों के लिए अधिक से अधिक जगह उपलब्ध कराने का प्रयास। 93 धार्मिक स्थलों को पुरातन स्थल के रूप में पंजीकरण। उनका आरक्षण कायम रखा गया है। 20 प्रतिशत जगह कला और संस्कृति के लिए रखी गई है। पेट्रोल पंप, सिनेमाघरों की आरक्षित जगह पर कला, संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए जगह का पुनर्विकास करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। संजय गांधी नेशनल पार्क के झोपड़ों का पुनर्वास आरे कालोनी में  किया जाएगा। सभी तरह के होटलों को अधिक एफएसआई मिलेगी। घर का आंतरिक डिजाइन मकान मालिक खुद तय कर सकेगापेट्रोल पंप के कुछ हिस्से को छोड़कर बाकी जगह का वाणिज्यिक उपयोग हो सकेगा और 12,700 हेक्टर भूखंड हरा व प्राकृतिक क्षेत्र नैसर्गिक क्षेत्र घोषित किया गया है।
मुंबई के नए डीपी प्लान पर भड़की कांग्रेस 
कांग्रेस ने मुंबई के नए डीपी प्लान पर आपत्ति जताई है। कांग्रेस का आरोप है नए विकास प्लान से बिल्डरों को फायदा होगा। बीपीटी जमीन का आरक्षण समाप्त करके घोटाले किए जाने की संभावना है। जमीनों को बड़े बिल्डर और रियल इस्टेट को देने की साजिश रची गई है। कांग्रेस के मुंबई अध्यक्ष ने संजय निरूपम ने यह आरोप लगाए हैं।
निरूपम के मुताबिक डीपी प्लान सिर्फ बिल्डरों के फायदे के लिए तैयार किया गया है। महानगर की जो जमीनें विकास क्षेत्र में थी, वह अब खुली हो जाएंगी, जिसका लाभ बड़े बिल्डरों को मिलेगा। निरुपम ने आरोप लगाया कि बांबे पोर्ट ट्रस्ट (बीपीटी) की जमीनों का आरक्षण खत्म किया जा रहा है। इसमें बड़े पैमाने पर घोटाला होते नजर आ रहा है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि बीपीटी का विकास करना है, इसके लिए अहमदाबाद से सलाहकार मंगाए गए हैं। असल में मुंबई की बीपीटी की जमीन बड़े बिल्डरों और रियल इस्टेट को देने का षडयंत्र रचा गया है। एसआरए योजना में भी फेरबदल किया जा रहा है, जो बेहद गलत है। व्यवसायिक क्षेत्र को 5 एफएसआई दी जाएगी, जिसके भविष्य में भयंकर परिणाम दिखाई देंगे, इसके चलते कमला मिल जैसा अंधाधुंध वाणिज्यिक निर्माणकार्य होगा। इससे मुंबई का नुकसान होगा।
निरूपम ने कहा कि मुंबई शहर की एफएसआई उपनगर की तुलना में कम है। पहली बार शहर में 3 एफएसआई दी जाएगी, जिससे मुंबई में रहना कंजस्टेड हो जाएगा। पूरे मुंबई में जिस विभाग में 22 प्रतिशत रिहायशी क्षेत्र है, वहां 50 प्रतिशत रिहायशी क्षेत्र बनाना है। हमारी पहले से मांग है कि नए घर शहर के बाहर बनाए जाएं। परंतु नए डीपी प्लान से घरों की संख्या बढ़ेगी। निरूपम के अनुसार मुख्यमंत्री का कहना है कि 10 लाख सस्ते मकान बनाए जाएंगे। लेकिन मुंबई में पहले से बने सवा पांच लाख घरों की बिक्री नहीं हो रही है, यैसे में 10 लाख नए घर बनाने की जरूरत क्या है। यदि घर एक करोड़ रुपए में मिलेंगे तो किफायती मकान किस आधार पर हुए। इस प्लान से 15 लाख झोपड़पट्टीवासियों का बुरा हाल होगा।
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